नई दिल्ली/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते युद्ध के बादलों के बीच अमेरिका ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बड़ा ‘हाईटेक ऑपरेशन’ शुरू किया है। ईरान और अन्य क्षेत्रीय तनावों को देखते हुए अमेरिकी नौसेना ने इस समुद्री रास्ते में बिछी संभावित बारूदी सुरंगों (Sea Mines) को साफ करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
हाईटेक हथियारों से लैस अमेरिकी सेना
इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अमेरिका ने केवल पारंपरिक युद्धपोत ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया है।
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उन्नत युद्धपोत: विशेष रूप से माइन-हंटर जहाजों को तैनात किया गया है जो समुद्र की गहराई में छिपे विस्फोटकों का पता लगाने में सक्षम हैं।
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घातक ड्रोन्स (UAVs & UUVs): पानी के ऊपर और नीचे काम करने वाले ड्रोन्स का उपयोग किया जा रहा है ताकि बिना किसी मानवीय जान के जोखिम के सुरंगों को नष्ट किया जा सके।
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हेलीकॉप्टर निगरानी: ‘सी ड्रैगन’ जैसे हेलिकॉप्टरों के जरिए आसमान से समुद्री सतह की बारीकी से निगरानी की जा रही है।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यह रास्ता बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
तनाव बढ़ने की आशंका
अमेरिका के इस कदम को ईरान के लिए एक सीधे संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हालिया तनाव के बाद ऐसी आशंकाएं जताई जा रही थीं कि व्यापारिक जहाजों को रोकने के लिए समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाई जा सकती हैं। अमेरिका ने ‘सुरक्षित नेविगेशन’ का हवाला देते हुए यह ऑपरेशन शुरू किया है, जिससे क्षेत्र में सैन्य हलचल और बढ़ गई है।

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