टक्कर की आवाज दूर तक गूंजी
घटना के वक्त सड़क पर सामान्य ट्रैफिक था। अचानक तेज रफ्तार से आते दो भारी वाहन आमने-सामने भिड़े। झटका इतना जोरदार था कि टैंकर का अगला हिस्सा मुड़ गया और ट्रेलर का केबिन धंस गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को कॉल किया। कुछ ही मिनटों में मौके पर भीड़ जुट गई। लोग दूर खड़े होकर मलबे को देखते रहे। केबिन के अंदर फंसा चालक मदद के लिए चीख रहा था। हवा में डीजल की गंध थी। माहौल तनाव से भरा हुआ।
रेस्क्यू ऑपरेशन और जाम का दबाव
पुलिस और स्थानीय टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू आसान नहीं था। लोहे की चादरें मुड़ चुकी थीं। कटर मशीन लाई गई। धीरे-धीरे केबिन काटा गया। आखिरकार चालक को बाहर निकाला गया और अस्पताल भेजा गया। इस दौरान सड़क पूरी तरह ब्लॉक रही। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। करीब 3 घंटे तक यातायात बाधित रहा। इसी जाम में मंत्री का काफिला भी रुका रहा, जिससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया।
“टक्कर बहुत जबरदस्त थी। चालक बुरी तरह फंस गया था। टीम ने काफी मेहनत के बाद उसे सुरक्षित निकाला।” — स्थानीय पुलिस अधिकारी
घटना के बाद पुलिस ने दोनों वाहनों को हटाकर रास्ता साफ किया। ट्रैफिक धीरे-धीरे सामान्य हुआ। अब जांच इस बात पर है कि हादसे की वजह क्या थी—ओवरस्पीड या लापरवाही। हाईवे पर भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही चिंता बढ़ा रही है। इस तरह की टक्करें सिर्फ दुर्घटना नहीं, सिस्टम पर सवाल भी खड़े करती हैं। निगरानी बढ़ेगी या नहीं—यह अब देखने वाली बात है।

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