Lok Sabha Rajya Sabha News , नई दिल्ली — भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी विशेष संसद सत्र के लिए अपने सभी सांसदों को कमर कसने का निर्देश दिया है। पार्टी के कार्यालय सचिव शिव शक्ति नाथ बख्शी द्वारा रविवार को जारी एक आधिकारिक व्हिप में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों को 16 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि इन तीन दिनों के दौरान किसी भी सदस्य को छुट्टी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह तीन दिन?
भाजपा का यह ‘थ्री-लाइन व्हिप’ तब आया है जब सरकार महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में महत्वपूर्ण संशोधन लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार 2029 के चुनावों से पहले इस कानून को लागू करने के लिए 2011 के जनगणना आंकड़ों का उपयोग करने का प्रस्ताव रख सकती है। बजट सत्र के छोटे ब्रेक के बाद 16 अप्रैल से शुरू हो रहे इस 3 दिवसीय विशेष सत्र में कई बड़े सुधार विधेयकों पर वोटिंग होने की संभावना है।
व्हिप में विशेष रूप से केंद्रीय मंत्रियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे कार्यवाही के दौरान अपनी सीट पर मौजूद रहें। शनिवार, 18 अप्रैल को सदन की कार्यवाही देर शाम तक चलने के आसार हैं, क्योंकि सरकार कुछ महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को उसी दिन पूरा करना चाहती है।
विपक्ष की घेराबंदी और सियासी हलचल
भाजपा की इस सक्रियता ने विपक्षी खेमे में भी खलबली मचा दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने परिसीमन (Delimitation) और आरक्षण के प्रावधानों पर उन्हें भरोसे में नहीं लिया है।
दिल्ली के गलियारों में चर्चा तेज है कि सरकार इन तीन दिनों में कुछ ऐसे ‘सरप्राइज’ कार्ड खेल सकती है, जो 2029 के चुनावी रोडमैप को पूरी तरह बदल देंगे। सदन में 100% उपस्थिति सुनिश्चित करना भाजपा की इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
“पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुशासन सर्वोपरि है। 16 से 18 अप्रैल तक देश के हित में कुछ बड़े विधायी कदम उठाए जा सकते हैं, और हर सांसद की उपस्थिति वहां अनिवार्य है। कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।” — भाजपा सूत्र, नई दिल्ली
16 अप्रैल की सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की घंटी बजेगी, सरकार का एजेंडा साफ हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार महिला आरक्षण को बिना जनगणना (Census) के लागू करने का दांव खेलती है, तो यह भारतीय राजनीति का एक ऐतिहासिक पल होगा। अगले 72 घंटों में होने वाली हर हलचल देश की लोकतांत्रिक दिशा तय करेगी।

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