रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों मुख्यमंत्री सचिवालय (CM Secretariat) की चर्चा जोरों पर है। पिछले दो दशकों में देश भर के राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी मुख्यमंत्री सचिवालय की ताकत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। कभी राज्य की प्रशासनिक शक्ति का केंद्र ‘मुख्य सचिव’ (Chief Secretary) का कार्यालय हुआ करता था, लेकिन अब सत्ता की धुरी पूरी तरह से मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर शिफ्ट हो गई है।
CS बनाम CMO: किसके पास कितनी पावर?
प्रशासनिक नियमों के अनुसार मुख्य सचिव के पास असीमित शक्तियां होती हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति और कार्यकाल मुख्यमंत्री की इच्छा पर निर्भर करता है। जानकारों का मानना है कि वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सचिवालय जो निर्णय लेता है, प्रशासन में वही अंतिम होता है। मुख्य सचिव नीतियों के क्रियान्वयन के प्रमुख होते हैं, लेकिन नीतियों का निर्धारण और उन पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘पावरफुल’ आईएएस अधिकारियों की टीम लगाती है।
साय सचिवालय के ‘सुपर सिक्स’: ये हैं पर्दे के पीछे के खिलाड़ी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सचिवालय में आधा दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारी तैनात हैं, जो राज्य के महत्वपूर्ण विभागों की फाइलें और निर्णय प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं:
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पी. दयानंद (IAS 2006): मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में सबसे अहम भूमिका में हैं। वे सीएमओ और अन्य विभागों के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
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सुब्रत साहू (IAS 1992): वरिष्ठता और अनुभव के मामले में साय टीम के मजबूत स्तंभ माने जाते हैं।
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बसवराजू एस. (IAS 2007): सचिव स्तर पर तैनात, विकास कार्यों और प्रशासनिक तालमेल में इनकी विशेषज्ञता मानी जाती है।
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राहुल भगत (IAS 2005): केंद्र से प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद साय सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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अंकित आनंद (IAS 2006): वित्त और तकनीकी पहलुओं पर गहरी पकड़ रखने वाले अंकित आनंद की सचिवालय में बड़ी भूमिका है।
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चंद्रकांत वर्मा (IAS 2017): युवा अधिकारी के रूप में सचिवालय के कामकाज में गति लाने का काम कर रहे हैं।
दो दशकों में कैसे बदला पावर गेम?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अजीत जोगी के कार्यकाल से शुरू होकर डॉ. रमन सिंह और भूपेश बघेल के दौर तक आते-आते सीएम सचिवालय एक ‘सुपर कैबिनेट’ की तरह काम करने लगा है।
“मुख्यमंत्री अपनी सुविधानुसार भरोसेमंद अधिकारियों की टीम चुनते हैं, जिससे वे सीधे जिला स्तर तक मॉनिटरिंग कर सकें। यही कारण है कि आज प्रदेश की हर बड़ी फाइल मुख्य सचिव की मेज पर जाने से पहले सीएम सचिवालय के इन ताकतवर आईएएस अफसरों की मेज से होकर गुजरती है।”

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