लेह (लद्दाख): लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बुलंद करने वाले प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार को करीब 170 दिनों के लंबे अंतराल के बाद वापस लेह पहुंचे। जैसे ही वे लेह की सीमा में दाखिल हुए, हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों ने पारंपरिक गीतों, नारों और ‘खाता’ (लद्दाखी स्कार्फ) के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।
170 दिन बाद खत्म हुआ ‘वनवास’
सोनम वांगचुक को केंद्र सरकार ने 14 मार्च को बड़ी राहत देते हुए उन पर लगा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) हटा लिया था। इसके तुरंत बाद उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल से रिहा किया गया। ज्ञात हो कि लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन पर यह कड़ी कार्रवाई की गई थी।
“उम्मीद अभी बाकी है”: वांगचुक का पहला बयान
लेह पहुंचने के बाद जनता को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में वांगचुक ने कहा:
“6 महीने का समय लंबा था, लेकिन लद्दाख के हक की लड़ाई कमजोर नहीं हुई है। मैं जेल से एक नई उम्मीद लेकर लौटा हूँ। हमें अपने हिमालय, अपनी संस्कृति और अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए संवैधानिक सुरक्षा चाहिए। हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।”
स्वागत में उमड़ा पूरा लद्दाख
वांगचुक के स्वागत के लिए लेह की सड़कों पर भारी भीड़ देखी गई। ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (LAB) और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस’ (KDA) के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं इस दौरान मौजूद रहे। समर्थकों का कहना है कि वांगचुक की वापसी से लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई को फिर से नई ऊर्जा मिलेगी।

More Stories
Air Travel Will Be Expensive : 23 मार्च से घरेलू फ्लाइट्स के किराए पर लगी रोक हटी, मांग के हिसाब से कंपनियां तय करेंगी दाम
Justice Suryakant : CJI जस्टिस सूर्यकांत की दोटूक ‘न्याय प्रणाली को मजबूत करे AI, लेकिन जज की जगह न ले’; फैसले सुनाने में दखल बर्दाश्त नहीं
Global Terrorism Index 2026 : भारत में आतंकी घटनाओं में 43% की भारी कमी, पाकिस्तान दुनिया का नया ‘आतंकी गढ़’