- पहला स्वरूप: पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।
- विशेष लाभ: मां की पूजा से जीवन में स्थिरता आती है और सफलता के मार्ग खुलते हैं।
- पसंदीदा भोग: मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं और गाय का घी अत्यंत प्रिय है।
Chaitra Navratri 2026 , नई दिल्ली — चैत्र नवरात्रि 2026 का आगाज हो चुका है। शक्ति की उपासना के इस महापर्व का पहला दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप, मां शैलपुत्री को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। मां के इस स्वरूप की आराधना से जातक को मानसिक शांति और अटूट साहस की प्राप्ति होती है।
शक्ति की ‘पिच’ पर सफलता के मंत्र
जिस तरह एक खिलाड़ी मैदान पर उतरने से पहले पूरी तैयारी करता है, उसी तरह नवरात्रि के नौ दिनों की आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत मां शैलपुत्री के आशीर्वाद से होती है। मां शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए वृषभ (बैल) पर सवार होती हैं।
मां शैलपुत्री के सिद्ध मंत्र
- मंत्र 1: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
- मंत्र 2 (प्रार्थना): वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
मां शैलपुत्री की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे उत्तम माना गया है। भक्त इस दिन मां को सफेद फूलों की माला अर्पित करते हैं। सफेद रंग शुद्धता और शांति का प्रतीक है, जो भक्त के अंतर्मन को जागृत करता है।
“मां शैलपुत्री पर्वतराज की बेटी हैं। जिस प्रकार हिमालय अपनी जगह अडिग रहता है, वैसे ही मां की कृपा से भक्त के संकल्प और जीवन में स्थिरता आती है। नवरात्रि का पहला दिन पूरे नौ दिनों की ऊर्जा का आधार होता है।”
— आचार्य, धर्म डेस्कनवरात्रि के पहले दिन की पूजा का सीधा संबंध व्यक्ति के मूलाधार चक्र से होता है। यह चक्र जीवन की नींव है। मां शैलपुत्री की उपासना से न केवल धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि यह व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

More Stories
Chaitra Navratri 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री पूजा की तैयारी तेज
Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्रि कैलेंडर 2026 कब है अष्टमी और राम नवमी यहाँ देखें 9 दिनों का पूरा शेड्यूल
Som Pradosh Vrat 2026 : सोम प्रदोष व्रत 2026 आज शिव पूजा के साथ जरूर सुनें यह कथा, चमक उठेगा भाग्य