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March 14, 2026

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A Major Diplomatic Victory For India : ‘शिवालिक’ के बाद ‘नंदा देवी’ भी होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकला, ईरान ने दिया ‘सेफ पैसेज’

नई दिल्ली। युद्ध की आग में झुलस रहे पश्चिम एशिया के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए राहत भरी खबर है। रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) से भारत के दो बड़े एलपीजी (LPG) टैंकर सुरक्षित बाहर निकल गए हैं। ‘शिवालिक’ के बाद अब ‘नंदा देवी’ ने भी इस खतरनाक जलडमरूमध्य को पार कर लिया है।

ईरान का भारत को विशेष सहयोग: “भारत हमारा दोस्त है”

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद पड़ा है, जिससे वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति ठप है। ऐसे में ईरान ने केवल भारतीय जहाजों को रास्ता देकर अपनी दोस्ती निभाई है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने स्पष्ट कहा, “भारत हमारा दोस्त है और हमारे हित साझा हैं। हम भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना जारी रखेंगे।”

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92,700 टन रसोई गैस लेकर भारत आ रहे हैं जहाज

शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, दोनों जहाज 92,700 टन एलपीजी लेकर गुजरात के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।

  • शिवालिक: यह जहाज मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port) पर डॉक करेगा।

  • नंदा देवी: यह जहाज कांडला पोर्ट (Kandla Port) पर पहुंचेगा। ये दोनों जहाज उन 24 भारतीय जहाजों में शामिल थे, जो युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए थे। इनके आने से देश में रसोई गैस की संभावित किल्लत दूर होने की उम्मीद है।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति पजेशकियन की बातचीत का असर

यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मससूद पजेशकियन के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत का परिणाम मानी जा रही है। भारत ने स्पष्ट किया था कि ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी इन टैंकरों की सुरक्षा के लिए अलर्ट मोड पर हैं और उनकी मूवमेंट की निगरानी कर रहे हैं।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह संकरा समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया का 20% तेल और गैस गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 90% एलपीजी इसी रास्ते से आयात करता है। वर्तमान युद्ध के कारण इस मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

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