मुहूर्त और महत्व: क्यों खास है इस बार की एकादशी?
ज्योतिष गणना के अनुसार, पापमोचनी एकादशी पर इस बार ग्रहों की स्थिति सुख-समृद्धि के द्वार खोलने वाली है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ और व्रत का संकल्प लेना जीवन में अनुशासन और शुद्धि लाता है। पौराणिक कथाओं में ऋषि च्यवन के पुत्र मेधावी ने भी इसी व्रत के प्रभाव से अपनी खोई हुई आभा और पुण्य वापस पाए थे।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ तुलसी पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है। कर्ज मुक्ति के लिए शाम के समय तुलसी के पास गाय के घी का दीपक जलाना और 108 बार परिक्रमा करना विशेष लाभ देता है।
“तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। एकादशी के दिन तुलसी के पत्तों को तोड़ना वर्जित है, लेकिन इसकी जड़ की मिट्टी का तिलक लगाना और सात्विक दान करना व्यक्ति को दरिद्रता के चक्र से बाहर निकालता है।”
— आचार्य राजेश पाठक, प्रमुख ज्योतिषाचार्य
शहर के प्रमुख मठ-मंदिरों के विद्वानों ने इस दिन के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय सुझाए हैं, जो आम नागरिकों के लिए सहायक हो सकते हैं:
- शाम का दीप दान: एकादशी की संध्या को तुलसी के पौधे के पास दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष कम होता है और धन के आगमन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।
- तुलसी की जड़ का उपाय: आर्थिक संकट अधिक हो तो तुलसी की सूखी जड़ को पीले कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी या धन स्थान पर रखें। यह उपाय व्यापार में लाभ के लिए सटीक माना जाता है।
- विष्णु चालीसा का पाठ: तुलसी के सम्मुख बैठकर विष्णु चालीसा या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। इससे मानसिक तनाव कम होता है और सोचे हुए कार्य समय पर पूरे होते हैं।

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