ईरानी जहाज IRIS Lavan को कोच्चि में शरण: ‘मानवीय आधार पर लिया फैसला’
सदन में चर्चा के दौरान जयशंकर ने उस घटनाक्रम पर भी रोशनी डाली जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने बताया कि ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan को मानवीय आधार पर 4 मार्च को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति दी गई। मंत्री ने कहा कि यह जहाज ‘मिलन 2026’ नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर लौट रहा था, लेकिन क्षेत्रीय तनाव के कारण वह मुश्किल में फंस गया था।
“ईरान ने हमसे मानवीय मदद मांगी थी। जहाज पर कई युवा कैडेट सवार थे। हमने इसे मानवता के दृष्टिकोण से देखा और शरण दी। ईरानी विदेश मंत्री ने इस ‘ह्यूमन जेस्चर’ के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है। हम अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री नियमों का पूर्ण सम्मान करते हैं।”
— एस जयशंकर, विदेश मंत्री
इवैक्युएशन का ‘सेफ प्लान’: कैसे हो रही है वापसी?
विदेश मंत्री ने बताया कि वेस्ट एशिया में बिगड़ते हालातों के बावजूद भारत सरकार ने एक बहुस्तरीय योजना तैयार की है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से ही कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) इस पर नजर रखे हुए है।
- स्पेशल कंट्रोल रूम: विदेश मंत्रालय ने 24×7 हेल्पलाइन और एक समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
- फ्लाइट ऑपरेशन्स: एयर इंडिया और अन्य एयरलाइंस के माध्यम से दुबई, अबू धाबी और मस्कट जैसे केंद्रों से फंसे हुए यात्रियों को लाने के लिए अतिरिक्त उड़ानें संचालित की जा रही हैं।
- पड़ोसी देशों का सहयोग: कुछ भारतीयों को आर्मेनिया जैसे पड़ोसी देशों के रास्ते भी सुरक्षित निकाला जा रहा है।
- नौसैनिक सतर्कता: भारतीय नौसेना हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अलर्ट पर है।
जयशंकर ने आगाह किया कि वेस्ट एशिया का तनाव वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। चूंकि भारत का करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार इसी क्षेत्र से होता है, इसलिए सरकार कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति में होने वाले किसी भी व्यवधान पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने दोहराया कि भारत शांति का पक्षधर है और सभी पक्षों से ‘संवाद और कूटनीति’ (Dialogue and Diplomacy) की ओर लौटने की अपील करता है

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