डीपफेक के खिलाफ मोदी का ‘डिजिटल सुरक्षा’ विजन
प्रधानमंत्री मोदी ने समिट में तकनीकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि डीपफेक केवल एक तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास के लिए खतरा है। उन्होंने सुझाव दिया कि जब भी कोई एआई टूल कंटेंट जनरेट करे, तो उसमें एक ऐसा डिजिटल वॉटरमार्क या लेबल होना चाहिए जिसे यूजर आसानी से देख सके। इससे असली और नकली के बीच का फर्क साफ होगा। उन्होंने आईटी मंत्रालय को इस दिशा में वैश्विक स्तर पर मानक (Standards) तय करने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया।
मुकेश अंबानी का दावा: नौकरियां सुरक्षित हैं
समिट के दौरान मुकेश अंबानी ने एआई के आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पर बात की। उन्होंने कहा कि एआई के आने से कार्यक्षमता बढ़ेगी। अंबानी ने जोर देकर कहा, “इतिहास गवाह है कि हर नई तकनीक ने शुरुआत में नौकरियों के जाने का डर पैदा किया, लेकिन अंत में उसने अधिक रोजगार दिए। हम यह साबित करेंगे कि एआई नौकरियां नहीं छीनता, बल्कि इंसानी कौशल को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।” रिलायंस इस दिशा में बड़े निवेश की योजना बना रहा है ताकि छोटे उद्योगों को एआई से लैस किया जा सके।
“एआई के युग में ‘अंधविश्वास’ खतरनाक है। कंटेंट के साथ उसका स्रोत और उसकी प्रकृति (AI या Human) जुड़ी होनी चाहिए। यह तकनीकी पारदर्शिता नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा के लिए अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है।”

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