PM Modi , नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन में काम करने के अपने नजरिए को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। 15 फरवरी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि वे अपने स्वभाव से कभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते। उनके अनुसार, देश के लिए और अधिक हासिल करने की यह ‘रचनात्मक बेचैनी’ (Constructive Restlessness) ही उन्हें लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब आप जनता की सेवा में होते हैं, तो संतुष्ट होकर बैठ जाना प्रगति को रोक सकता है।
पीएम मोदी ने विस्तार से बताया कि सुधारों की गति को बनाए रखने के लिए मन में एक टीस होना जरूरी है। उन्होंने भारत की प्रगति को ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ (Reform Express) का नाम दिया। प्रधानमंत्री का मानना है कि पिछले एक दशक में देश ने बड़े ढांचागत बदलाव देखे हैं, लेकिन मंजिल अभी दूर है। “बेहतर सेवा करने की भूख ही आपको नई ऊंचाइयों पर ले जाती है,” पीएम ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह असंतोष नकारात्मक नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है जो सिस्टम में सुधार की रफ्तार को कभी कम नहीं होने देती।
“स्वभाव से मैं कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता। मेरा मानना है कि सार्वजनिक जीवन में कुछ रचनात्मक करने के लिए बेचैनी, ज्यादा करने की लगातार इच्छा, तेजी से सुधार करने और बेहतर सेवा करने की जरूरत होती है।”
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
More Stories
Bhiwadi Fire Incident : केमिकल फैक्ट्री में धमाकों के बाद तांडव, 7 मजदूर जिंदा जले, कंकाल बने शव देख कांप उठी रूह
JNU : कैंपस में कन्हैया की वापसी जेएनयू में निलंबित छात्र नेताओं के समर्थन में गूंजे तीखे नारे
T20 वर्ल्ड कप IND vs PAK: अभिषेक शर्मा शून्य पर आउट, कोलंबो में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर भारत को दी पहले बैटिंग ईशान-तिलक ने संभाला मोर्चा