डिब्रूगढ़/गुवाहाटी। पूर्वोत्तर भारत की सामरिक सुरक्षा और विकास के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम दौरे के दौरान डिब्रूगढ़ के पास मोरन बाईपास (NH-37) पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर उतरकर चीन और पड़ोसी देशों को सीधा संदेश दिया। यह पूर्वोत्तर का पहला ऐसा ‘हाईवे रनवे’ है, जो युद्ध या आपात स्थिति में लड़ाकू विमानों के ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है।
सामरिक शक्ति का प्रदर्शन: हाईवे पर लैंडिंग और एयर-शो
प्रधानमंत्री का C-130J सुपर हर्कुलिस विमान किसी एयरपोर्ट पर नहीं, बल्कि सीधे नेशनल हाईवे की स्ट्रिप पर उतरा। उनके स्वागत में भारतीय वायुसेना के सबसे घातक लड़ाकू विमानों— राफेल (Rafale), सुखोई (Su-30 MKI) और स्वदेशी तेजस (Tejas) ने आसमान में अपना पराक्रम दिखाया।
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रणनीतिक महत्व: यह एयरस्ट्रिप वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो भविष्य में किसी भी चीनी चुनौती का जवाब देने के लिए वायुसेना की क्षमता को दोगुना कर देगी।
₹5,450 करोड़ के प्रोजेक्ट्स की सौगात
सिर्फ सैन्य शक्ति ही नहीं, पीएम मोदी ने असम के बुनियादी ढांचे को भी मजबूती दी। उन्होंने गुवाहाटी में ₹5,450 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स:
ब्रह्मपुत्र नदी पर बना ₹3,030 करोड़ का यह 6-लेन ‘एक्स्ट्राडोज्ड’ पुल गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ेगा, जिससे घंटों का सफर मात्र 7 मिनट में पूरा होगा।
IIM गुवाहाटी: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति के लिए आईआईएम के अस्थायी परिसर का उद्घाटन।
राष्ट्रीय डेटा केंद्र: उत्तर-पूर्व के लिए अत्याधुनिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की आधारशिला।
चीन-बांग्लादेश को कड़ा संदेश
बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच, पीएम मोदी का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। हाईवे पर विमान उतारकर भारत ने यह साफ कर दिया है कि उसकी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रक्षात्मक रूप से भी बेहद आक्रामक और तैयार है। यह उन ताकतों के लिए खुली चेतावनी है जो पूर्वोत्तर की शांति को भंग करने का प्रयास करती हैं।

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