फसलों की बर्बादी बना विवाद का कारण
हंगामे की मुख्य वजह प्लांट से निकलने वाला अपशिष्ट (वेस्ट) है। ग्रामीणों का आरोप है कि मक्का प्लांट से निकलने वाले कचरे और रसायनों की वजह से आसपास के खेतों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। प्रदर्शनकारी मुआवजे की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से विरोध जता रहे थे, लेकिन शुक्रवार सुबह यह विरोध हिंसा में बदल गया। भीड़ ने न केवल फर्नीचर तोड़ा, बल्कि सरकारी फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया।
पुलिस और प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्रामीणों का आक्रोश इतना तेज था कि प्लांट के गार्ड खुद को बचाने के लिए कमरों में छिप गए। जब प्रशासन ने सुरक्षा बलों को भेजा, तो ग्रामीणों ने जंगल की तरफ से मोर्चा संभाल लिया। गुलेल का इस्तेमाल कर भीड़ ने पुलिस को पीछे धकेलने की कोशिश की। वर्तमान में जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं।
“ग्रामीणों ने बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक हमला किया। प्लांट की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। हमने अतिरिक्त बल तैनात किया है। दोषियों की पहचान की जा रही है, कानून हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
— अक्षय प्रमोद साबरी, पुलिस अधीक्षक (SP), कोंडागांव

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