35 साल बाद ‘बेगमों की जंग’ का अंत, पुरुष प्रधानमंत्री की एंट्री
बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह चुनाव एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। पिछले 35 वर्षों से देश की सत्ता ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ यानी शेख हसीना और खालिदा जिया के इर्द-गिर्द घूमती रही है। 1991 के बाद यह पहली बार होगा जब देश की कमान किसी पुरुष प्रधानमंत्री के हाथ में होगी। 60 वर्षीय तारिक रहमान, जो पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं, ने अपनी मां के निधन और अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के बाद पार्टी को इस ऐतिहासिक जीत तक पहुंचाया है।
जमात-ए-इस्लामी पिछड़ी, निर्दलीयों का रहा बोलबाला
चुनाव में मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानी जा रही जमात-ए-इस्लामी और उसके 11 दलीय गठबंधन को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली है। जमात के खाते में अब तक करीब 62 सीटें आई हैं। वहीं, छात्रों के नेतृत्व वाली नई पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई सीटों पर चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, देश के 36 हजार केंद्रों पर औसत 47.91% मतदान हुआ, जो 2024 के विवादित चुनाव से कहीं अधिक है।
“यह बांग्लादेश के लोगों की जीत है जिन्होंने भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ वोट दिया। हमारा पहला लक्ष्य देश में कानून का राज स्थापित करना और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है।”
— मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, महासचिव, BNP

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