परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव: पारदर्शिता पर सरकार का जोर
नए नियमों के तहत, निजी स्कूलों को अब परीक्षा की समय-सारणी, प्रश्नपत्रों का स्तर और मूल्यांकन की प्रक्रिया को जिला शिक्षा कार्यालय के साथ साझा करना होगा। लोक शिक्षण संचालनालय का मानना है कि इस कदम से शिक्षा की गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और निजी स्कूलों द्वारा परीक्षा परिणामों में किए जाने वाले कथित हेरफेर पर रोक लगेगी। आदेश के अनुसार, DEO अपनी टीम के माध्यम से केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
Voices from the Ground / आधिकारिक बयान
“निजी स्कूलों में परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता लाने के लिए यह निर्देश जारी किए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को नोडल एजेंसी बनाया गया है। अब वार्षिक परीक्षाओं का शेड्यूल और मॉनिटरिंग सरकारी मानकों के अनुरूप होगी।” — लोक शिक्षण संचालनालय अधिकारी, छत्तीसगढ़
Impact on Residents / अभिभावकों और छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
इस फैसले का सीधा असर रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और जगदलपुर जैसे शहरों के लाखों स्कूली परिवारों पर पड़ेगा। अब अभिभावकों को परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर अधिक सुरक्षा मिलेगी। स्कूलों को अब परीक्षा परिणाम घोषित करने से पहले डेटा जिला शिक्षा कार्यालय को अपडेट करना पड़ सकता है। अगला कदम: निजी स्कूलों को अगले 15 दिनों के भीतर अपने स्कूल की आंतरिक मूल्यांकन रिपोर्ट और प्रस्तावित परीक्षा तिथियां DEO कार्यालय में जमा करनी होंगी। जो स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।



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