क्या है कोर मामला
यह मामला छत्तीसगढ़ में कथित कोयला परिवहन लेवी और अवैध वसूली नेटवर्क से जुड़ा है। ईओडब्ल्यू और ईडी की जांच में आरोप है कि एक संगठित सिंडिकेट ने कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन अवैध वसूली की। जांच एजेंसियों ने इस घोटाले की राशि 500 करोड़ रुपये से अधिक बताई है रायपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र और ईओडब्ल्यू कार्यालय के आसपास इस मामले को लेकर लंबे समय से हलचल बनी हुई थी। आरोपी पिछले कई महीनों से न्यायिक हिरासत में थे।
कोर्ट ने क्या शर्तें रखीं
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए साफ किया कि आरोपी:
- ट्रायल कोर्ट के समक्ष नियमित रूप से पेश होंगे।
- जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करेंगे।
- सबूतों या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।
जांच एजेंसियों का पक्ष
“मामला अभी ट्रायल में है। जमानत का मतलब आरोप खत्म होना नहीं है। जांच के दौरान जो सबूत सामने आए हैं, उन्हें अदालत में रखा जाएगा।” — जांच अधिकारी, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW)
रायपुर में माहौल और आगे क्या
कोर्ट के आदेश के बाद रायपुर जिला न्यायालय और आसपास के इलाकों में दिनभर वकीलों और मीडिया की आवाजाही बनी रही। आम लोगों के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज रहीं। अब निगाहें ट्रायल कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। प्रशासनिक हलकों में भी इस फैसले के बाद जवाबदेही और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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