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January 28, 2026

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Chhattisgarh Cook Protest : नवा रायपुर में रसोइयों का आंदोलन हुआ मातम में तब्दील, 30 दिन से जारी प्रदर्शन के बीच 2 महिलाओं की मौत

Chhattisgarh Cook Protest रायपुर — छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाले लगभग 86,000 रसोइयों का आंदोलन अब त्रासद मोड़ ले चुका है। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर पिछले एक महीने से अपनी मांगों को लेकर डटी दो महिला रसोइयों की इलाज के दौरान मौत हो गई है। इस घटना के बाद से आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश है, वहीं प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है।

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आंदोलन की भेंट चढ़ीं दो रसोइयां: दुलारी और रुकमणि की गई जान

शोक संतप्त परिवारों और रसोइया संघ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जान गंवाने वाली महिलाओं की पहचान बेमेतरा और बालोद जिले की निवासियों के रूप में हुई है:

  • दुलारी यादव (बेमेतरा): बेरला ब्लॉक के सालधा गांव की निवासी दुलारी 29 दिसंबर से तूता में डटी थीं। 25 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेकाहारा और फिर भिलाई रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, मेटाबोलिक एसिडोसिस और हार्ट संबंधी जटिलताओं के कारण उनकी मौत हुई।
  • रुकमणी सिन्हा (बालोद): कुसुमकसा की रुकमणी 20 से 23 जनवरी तक धरने में शामिल रहीं। घर लौटने पर उनकी स्थिति बिगड़ी और 26 जनवरी को राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में उन्होंने अंतिम सांस ली। परिजनों का कहना है कि आंदोलन की थकान और पेट में दिक्कत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था।

सियासी घमासान: कांग्रेस का हमला, सरकार की सफाई

इस दुखद घटना पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यूनतम मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी मांगों को भाजपा सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस ने सीधे तौर पर सरकार की ‘नाकामी’ को इन मौतों का जिम्मेदार ठहराया है।

दूसरी ओर, लोक शिक्षण संचालनालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि इन मौतों का धरना स्थल या हड़ताल से कोई ‘प्रत्यक्ष संबंध’ नहीं है। प्रशासन का तर्क है कि महिलाएं पहले से ही अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं।

क्यों सड़क पर हैं 86 हजार रसोइए?

छत्तीसगढ़ स्कूल मिड-डे मील यूनियन के बैनर तले जारी इस आंदोलन की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. न्यूनतम मानदेय: वर्तमान में मिल रहे अल्प मानदेय को बढ़ाकर सम्मानजनक राशि करना।
  2. स्थायीकरण: रसोइयों को सरकारी कर्मचारी के रूप में नियमित करना।
  3. सामाजिक सुरक्षा: ड्यूटी के दौरान किसी अनहोनी पर बीमा और परिवार को सुरक्षा प्रदान करना।

“हमारी दो बहनों ने अपनी मांगों के लिए लड़ते हुए जान दे दी। सरकार को अब तो जागना चाहिए। हम मृतकों के परिजनों के लिए उचित मुआवजे और मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग करते हैं।”

— रामराज कश्यप, अध्यक्ष, रसोइया संघ

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