Categories

January 11, 2026

वेब न्यूज़ पोर्टल संघर्ष के स्वर

संघर्ष ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

Litti Chokha Recipe : स्वाद की नींव, वह कला जो एक साधारण आटे को ‘परफेक्ट लिट्टी’ में बदल देती है

Litti Chokha Recipe : 2 जनवरी 2026| सर्दियों की गुनगुनी धूप हो और साथ में कोयले पर सिकती लिट्टी की सोंधी खुशबू, यह अहसास किसी उत्सव से कम नहीं है। लेकिन एक बेहतरीन लिट्टी की असली परीक्षा उसके भीतर भरे मसाले से नहीं, बल्कि उस बाहरी परत से होती है जो दांतों तले दबते ही ‘खस्ता’ होने का अहसास कराए। लिट्टी चोखा के शौकीनों के लिए यह केवल भोजन नहीं, बल्कि एक भावना है, जिसकी सफलता की पहली सीढ़ी रसोई में आटा गूंथने की उस बारीक कला में छिपी है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

CRPF Officer : फटाफट राउंड में लगातार सही जवाब देकर अधिकारी ने रचा इतिहास

बनावट और सलीके का संगम

एक आदर्श लिट्टी का बाहरी हिस्सा थोड़ा सख्त और खस्ता होना चाहिए, और इस बनावट को हासिल करना किसी इंजीनियरिंग से कम नहीं है। खेल की शुरुआत होती है तीन कप गेहूं के आटे के साथ, जिसमें आधे छोटे चम्मच अजवाइन की खुशबू एक खास देशी तड़का लगाती है। असली जादू तब शुरू होता है जब इसमें दो बड़े चम्मच घी या तेल का ‘मोयन’ डाला जाता है। यह मोयन ही वह गुप्त हथियार है जो आटे के कण-कण को बांधता है और उसे वह जरूरी खस्तापन देता है जिसकी उम्मीद हर पारखी करता है।

नमक का सही संतुलन स्वाद को उभारता है, लेकिन असली चुनौती पानी के इस्तेमाल में है। रोटी के नरम आटे के विपरीत, लिट्टी के लिए पानी का छिड़काव बहुत संभलकर करना पड़ता है। आटा जितना कड़ा और सधा हुआ गूंथा जाएगा, आग पर सिकने के बाद वह उतना ही सोंधा और कुरकुरा निकलकर आएगा। यह प्रक्रिया धैर्य की मांग करती है, जहाँ हाथों का जोर और आटे की नमी के बीच एक सही तालमेल बिठाना होता है।

परंपरा और आधुनिक रसोई का तालमेल

आज के दौर में जब फास्ट फूड का बोलबाला है, लिट्टी बनाने की यह पारंपरिक विधि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक जरिया है। आटे को सही तरीके से तैयार करना केवल पेट भरने की कवायद नहीं है, बल्कि यह उस विरासत को संजोने जैसा है जहाँ तकनीक से ज्यादा ‘अनुभव’ मायने रखता है। यदि आटा बहुत नरम हो जाए, तो लिट्टी अपना आकार खो देती है और वह पारंपरिक कड़कपन गायब हो जाता है, जो चोखे के साथ खाने पर असली स्वाद देता है।

रसोई के जानकारों की राय

“लिट्टी का बाहरी हिस्सा थोड़ा सख्त और खस्ता होना चाहिए, तभी उसका असली स्वाद उभरकर आता है।”

About The Author