Guru Ghasidas Jayanti : छत्तीसगढ़ की पावन धरती ने देश को कई महान संत और समाज सुधारक दिए हैं, जिनमें सतनाम पंथ के प्रवर्तक बाबा गुरु घासीदास का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र गिरौदपुरी धाम एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर हो जाता है। यही वह स्थल है, जहां स्थित जैतखाम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि अपनी भव्य ऊंचाई के कारण देश-दुनिया में विशेष पहचान रखता है।
ChatGPT : ChatGPT को सिर्फ चैटबॉट नहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की योजना
कुतुब मीनार से भी ऊंचा जैतखाम
बलौदाबाजार जिले के गिरौदपुरी धाम में स्थापित जैतखाम की ऊंचाई लगभग 77 फीट से अधिक मानी जाती है, जो दिल्ली की ऐतिहासिक कुतुब मीनार (करीब 73 मीटर) से भी ऊंचा बताया जाता है। यह जैतखाम सतनाम पंथ का सबसे बड़ा प्रतीक है और ‘जैत’ अर्थात सत्य की विजय का संदेश देता है। सफेद रंग का यह विशाल स्तंभ दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
गिरौदपुरी का आध्यात्मिक महत्व
गिरौदपुरी का आध्यात्म से गहरा नाता रहा है। मान्यता है कि यहीं बाबा गुरु घासीदास को आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने समाज को “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश दिया, जिसका अर्थ है कि सभी मनुष्य समान हैं। यह विचार उस समय के सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के विरुद्ध एक क्रांतिकारी कदम था।
तपोभूमि और औराधरा वृक्ष
ऐसा कहा जाता है कि बाबा गुरु घासीदास ने औराधरा वृक्ष के नीचे कठोर तपस्या की थी। यह स्थान आज तपोभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां आज भी श्रद्धालु ध्यान और साधना के लिए पहुंचते हैं। जैतखाम के ठीक बगल में बाबा के बैठने का स्थान भी स्थापित है, जहां भक्त मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
साधारण किसान परिवार में जन्म
बाबा गुरु घासीदास का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।
-
पिता का नाम: मंहगू
-
माता का नाम: अमरौतिन
-
पत्नी का नाम: सफुरा



More Stories
CM Vishnudev sai : कोरबा CM साय ने किया ‘अटल स्मृति भवन’ का भूमिपूजन, युवा कांग्रेस गिरफ्तार
Board Exams 2026 : छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग की बड़ी पहल, छात्रों का तनाव दूर करने के लिए ‘हेल्पलाइन सेवा’ शुरू
Surajpur Crime News : अवैध रिश्तों का खौफनाक अंत सूरजपुर के मोरभंज में भांजे ने मामी की गर्दन पर किया वार, इलाके में दहशत