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April 6, 2026

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प्लेसमेंट के बढ़ेंगे अवसर: जीईसी में डेटा साइंस और वीएलएसआई में शुरू होगी पीजी की पढ़ाई

जीईसी में पीजी कोर्स शुरू: डेटा साइंस और वीएलएसआई में बढ़ेंगे प्लेसमेंट के अवसर

रायपुर। सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज (जीईसी) में शिक्षा सत्र 2025-26 से पोस्ट ग्रेजुएशन (एम.टेक) की पढ़ाई शुरू होगी। इसके लिए कॉलेज प्रशासन ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) को पत्र लिखा था, जिसकी टीम ने 26 मार्च को कॉलेज का निरीक्षण किया। जल्द ही पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति मिलने की उम्मीद है।

राजकीय कॉलेज होने के कारण पहले राज्य शासन से अनुमति ली गई थी। कॉलेज प्रशासन ने सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल सहित छह पीजी कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव भेजा था, जिनमें से इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस ब्रांच के दो कोर्स—डेटा साइंस और एम्बेडेड सिस्टम एंड वीएलएसआई—18-18 सीटों के साथ शुरू करने की अनुमति मिली। इन कोर्सेज में दाखिला गेट परीक्षा के माध्यम से होगा, और छात्रों को 20 से 22 हजार रुपये शुल्क देना होगा।

एआईसीटीई की अंतिम मंजूरी बाकी

राज्य शासन से अनुमति मिलने के बाद एआईसीटीई को आवेदन भेजा गया था, जिसकी अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। रायपुर जीईसी में ये दोनों कोर्स शुरू किए जाएंगे, जबकि बिलासपुर और जगदलपुर जीईसी में पहले से अन्य पीजी कोर्स संचालित हैं। राजधानी होने के बावजूद रायपुर जीईसी में अब तक कोई पीजी कोर्स नहीं था, लेकिन अब यह कमी पूरी हो जाएगी।

तकनीकी कौशल और प्लेसमेंट बढ़ेगा

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एम.आर. खान ने बताया कि आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ छात्रों को अपडेट करना संस्थान का मुख्य लक्ष्य है। डेटा साइंस और वीएलएसआई की बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए इन कोर्सेज को शामिल किया गया है। इससे छात्रों का तकनीकी कौशल बढ़ेगा, प्लेसमेंट के बेहतर अवसर मिलेंगे और शोध को भी बढ़ावा मिलेगा।

यूजी और पीएचडी प्रोग्राम्स

जीईसी में बी.टेक की पांच शाखाओं—सिविल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, और मैकेनिकल इंजीनियरिंग—की पढ़ाई होती है। सिविल में 40 सीटें, जबकि अन्य कोर्स में 60-60 सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा, संस्थान में छह पीएचडी प्रोग्राम भी संचालित किए जा रहे हैं।

आईआईटी भिलाई के शिफ्ट होने से बढ़े अवसर

आईआईटी भिलाई 2016 से जीईसी कैंपस में संचालित हो रहा था, लेकिन पिछले साल यह दुर्ग के कुटेलाभाठा में अपने मुख्य परिसर में शिफ्ट हो गया। इसके बाद जीईसी ने खाली पड़ी इमारतों का उपयोग करने के लिए नए कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।

इन नए पाठ्यक्रमों के शुरू होने से छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर विकल्प मिलेंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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