परमाणु शीत (Nuclear Winter): 10 साल तक गायब हो जाएगा सूरज
वैज्ञानिकों के अनुसार, परमाणु धमाकों से निकलने वाली राख और धुआं वायुमंडल की ऊपरी परत को ढंक लेगा। इससे न्यूक्लिअर विंटर की शुरुआत होगी। सूरज की किरणें धरती तक नहीं पहुंच पाएंगी, जिससे तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे गिर जाएगा। स्टडी दावा करती है कि धरती पर 10 साल तक लगातार बर्फबारी होगी। खेती पूरी तरह ठप हो जाएगी और बचा हुआ समाज भुखमरी का शिकार बनेगा।
सिर्फ दो देशों में जीवन की उम्मीद, लेकिन राह कठिन
अगर पूरी दुनिया इस भीषण तबाही की चपेट में आती है, तो केवल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ही ऐसे देश होंगे जहां इंसानी जीवन के बचने की संभावना है। दक्षिण गोलार्ध में स्थित होने और अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण ये देश सीधी मार से बच सकते हैं। हालांकि, वहां भी संसाधनों की भारी कमी होगी और रेडिएशन का खतरा बना रहेगा।
“परमाणु युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। यह पूरी मानवता के सामूहिक विनाश का मार्ग है। मिसाइलें सिर्फ शहरों को नहीं, बल्कि उस पर्यावरण को भी जला देंगी जो हमें जीवित रखता है। वर्तमान वैश्विक भू-राजनीति को देखते हुए कूटनीति ही एकमात्र समाधान है।”
— डॉ. ए.के. वर्मा, रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ
भारत जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए यह स्थिति और भी भयावह है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, विशेषकर गंगा-यमुना के बेल्ट में कृषि पर निर्भरता अधिक होने के कारण ‘न्यूक्लिअर विंटर’ का सबसे घातक असर यहीं दिखेगा। प्रयागराज के सिविल लाइंस या कचहरी जैसे व्यस्त केंद्रों में भी आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। प्रशासन को अब वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक नीतियों पर विचार करने की आवश्यकता है।

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