नातम धर्म में वास्तु शास्त्र का एक अलग ही महत्व है, वास्तु के मुताबिक, घर में बाथरूम को बनाने की दिशा के बारे में बताया गया है। वास्तु के हिसाब के बने बाथरूम या कहें वाशरूम का सही दिशा में होना बेहद जरूरी है, नहीं तो घर में निगेटिव एनर्जी वास करने लग जाती है। इसके बाद घरवालों को काफी परेशानी और दिक्कत का सामना करना पड़ता है। साथ ही वास्तु दोष भी लग जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर में किस दिशा में वाशरूम या बाथरूम बनवाना चाहिए…
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वास्तु शास्त्र घर से जुड़ी वास्तुकला और डिजाइन का एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है, जो 5000 सालों से भी अधिक समय से चल रहा है। वास्तु शास्त्र में घर के लिए वास्तु दिशा और बनावट के आकाश आदि बताए गए हैं।
वाशरूम के लिए गलत दिशा
- घर की उत्तर पूर्व दिशा को भगवान की दिशा माना गया है, ऐसे में इस दिशा में कभी भी बाथरूम नहीं बनवाना चाहिए। इस दिशा में बाथरूम के होने से घर में निगेटिव एनर्जी बनी रहती है। ऐसा कहा जाता है कि घर में बाथरूम गलत दिशा में हो तो पिता के साथ रिश्ते खराब रहते हैं।
- साथ ही घर में भूलकर भी दक्षिण, दक्षिण पूर्व या दक्षिण पश्चिम दिशा में बाथरूम नहीं बनना चाहिए। इससे घर के सदस्यो की हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
- वहीं, बाथरूम में भूलकर भी लाल और काले रंग की बाल्टी का इस्तेमाल न करें
- इसके अलावा किचन के बगल वाशरूम नहीं बनवाना चाहिए।
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वाशरूम के लिए सही दिशा
- वास्तु के हिसाब से वाशरूम या कहें बाथरूम हमेशा घर के उत्तर-पश्चिम में होना चाहिए और टॉयलेट उत्तर-पश्चिम या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
- साथ ही वाशरूम में अच्छी हवादार जाली आदि भी जरूर लगाएं।
- बाथरूम में हल्के रंग जैसे लाइट पीला, हरा आदि का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इसके अलावा, बाथरूम में नीले रंग की बाल्टी का इस्तेमाल करें, ऐसा करने से घर में बरकत होती है।
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