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February 26, 2026

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Trump Third Country Deportation Policy

Trump Third Country Deportation Policy

Trump Third Country Deportation Policy : अमेरिका से बड़ी खबर ट्रंप का ‘थर्ड कंट्री’ डिपोर्टेशन प्लान रद्द, फेडरल जज ने सुनाई खरी-खरी

क्या है ‘थर्ड कंट्री’ डिपोर्टेशन और कोर्ट ने क्यों दी दखल?

ट्रंप प्रशासन की इस पॉलिसी के तहत अवैध प्रवासियों को उनके गृह देश (Origin Country) भेजने के बजाय किसी भी ऐसे ‘तीसरे देश’ (जैसे अल सल्वाडोर, दक्षिण सूडान या रवांडा) डिपोर्ट किया जा सकता था जो उन्हें स्वीकार करने को तैयार हो। इसमें प्रवासियों को पक्ष रखने के लिए मात्र 6 घंटे का समय दिया जाता था।

फेडरल जज ब्रायन मर्फी ने अपने फैसले में लिखा कि सरकार प्रवासियों को उनकी जानकारी के बिना किसी अनजान या खतरनाक देश में नहीं झोंक सकती। कोर्ट ने माना कि यह नीति प्रवासियों के ‘ड्यू प्रोसेस’ (उचित कानूनी प्रक्रिया) के अधिकार का उल्लंघन करती है।

“यह कहना कि किसी प्रवासी को तीसरे देश भेजना तब तक ठीक है जब तक सरकार को यह न पता हो कि वहां उसे उतरते ही गोली मार दी जाएगी, न तो मानवीय है और न ही कानूनी। अमेरिकी कानून किसी को भी प्रताड़ना या खतरे वाले देश में भेजने की इजाजत नहीं देते।”
— ब्रायन मर्फी, अमेरिकी जिला जज (मैसाचुसेट्स)

“हम इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। बाइडेन प्रशासन के दौरान लाखों अवैध प्रवासी देश में घुसे हैं, और ट्रंप प्रशासन के पास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इन्हें बाहर निकालने का संवैधानिक अधिकार है।”
— प्रवक्ता, डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS)

इस फैसले का सीधा असर उन हजारों भारतीयों और अन्य विदेशी नागरिकों पर पड़ेगा जो अमेरिका में शरण (Asylum) की तलाश में हैं या अवैध रूप से रह रहे हैं।

  • कानूनी ढाल: अब प्रशासन किसी भी भारतीय को अचानक रवांडा या मध्य अमेरिकी देशों में डिपोर्ट नहीं कर पाएगा।
  • नोटिस की अनिवार्यता: प्रवासियों को अब डिपोर्टेशन से पहले ‘मीनिंगफुल नोटिस’ (पर्याप्त समय वाला नोटिस) देना होगा।
  • अगली कार्रवाई: हालांकि कोर्ट ने इस फैसले को लागू करने पर 15 दिनों की रोक (Stay) लगाई है ताकि सरकार ऊपरी अदालत में अपील कर सके। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक जाने की पूरी संभावना है।

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