रायपुर: छत्तीसगढ़ में रसोई गैस (LPG) की उपलब्धता को लेकर मचे हाहाकार के बीच राज्य सरकार ने वितरण व्यवस्था को अपने हाथ में ले लिया है। खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहब कंगाले ने गुरुवार को ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में निर्णय लिया गया है कि अब गैस एजेंसियों और गोदामों पर होने वाली भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और होमगार्ड के जवानों की तैनाती की जाएगी।
पुलिस और होमगार्ड संभालेंगे कमान
खाद्य सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रदेश के सभी गैस केंद्रों और मुख्य गोदामों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे।
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अव्यवस्था पर लगाम: केंद्रों पर होने वाली छीना-झपटी और लंबी लाइनों में विवाद को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात रहेंगे।
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24 घंटे निगरानी: संवेदनशील इलाकों के गोदामों पर विशेष नजर रखी जाएगी ताकि ब्लैक मार्केटिंग (कालाबाजारी) को रोका जा सके।
कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए ’20 प्रतिशत’ का नियम
गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने व्यावसायिक (Commercial) उपभोक्ताओं के लिए नए नियम लागू किए हैं:
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खपत का हिस्सा: होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कमर्शियल संस्थानों को अब उनकी कुल मासिक खपत का केवल 20 प्रतिशत ही सिलेंडर मिल पाएगा।
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प्राथमिकता: सरकार का मुख्य फोकस घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic Users) को समय पर गैस उपलब्ध कराना है, ताकि आम जनता के घरों का चूल्हा जलता रहे।
सप्लाई चैन की समीक्षा
खाद्य सचिव ने ऑयल कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के कोटा में किसी भी तरह की कटौती न की जाए। बॉटलिंग प्लांट से लेकर एजेंसियों तक गैस पहुँचने के समय की ट्रैकिंग की जाएगी। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि कोई एजेंसी संचालक गैस की जमाखोरी या वितरण में अनियमितता करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस तत्काल रद्द कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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