मैदान की परिस्थिति और टॉस का समीकरण
धोनी ने वायरल वीडियो में चर्चा करते हुए बताया कि टी20 क्रिकेट के छोटे फॉर्मेट में रात के समय होने वाले मैचों में ओस की भूमिका निर्णायक होती है। जब मैदान पर ओस गिरती है, तो गेंद गीली हो जाती है और स्पिनर्स के लिए उसे ग्रिप करना मुश्किल हो जाता है। धोनी का डर यह है कि अगर टीम इंडिया नॉकआउट मैचों में टॉस हारती है और उसे बाद में गेंदबाजी करनी पड़ती है, तो हाथ में आया मैच भी फिसल सकता है। धोनी ने स्पष्ट किया कि स्किल्स से ज्यादा कभी-कभी कुदरती परिस्थितियां खेल का रुख बदल देती हैं।
- ग्रिप की समस्या: गीली गेंद से कलाई के स्पिनरों (Kuldeep/Chahal) को टर्न नहीं मिलता।
- बल्लेबाजी में आसानी: ओस के कारण गेंद बल्ले पर तेजी से आती है, जिससे पीछा करने वाली टीम को फायदा होता है।
- टॉस का दबाव: नॉकआउट मैचों में टॉस जीतने वाली टीम 70% मैच अपने नाम कर लेती है।
Voices from the Ground / Official Statements
“टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में आप सब कुछ कंट्रोल कर सकते हैं—अपनी फिटनेस, अपनी प्रैक्टिस—लेकिन ओस को नहीं। अगर शाम के मैचों में ओस गिरती है, तो टॉस जीतना आधा मैच जीतने जैसा हो जाता है। टीम इंडिया को इस ‘एक्स-फैक्टर’ के लिए तैयार रहना होगा।” — एमएस धोनी, पूर्व कप्तान, भारतीय क्रिकेट टीम (वायरल वीडियो के अंश)
Impact on Strategy / आगे की तैयारी
धोनी की इस चेतावनी के बाद क्रिकेट गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय टीम मैनेजमेंट अब ओस के प्रभाव को कम करने के लिए गीली गेंद से अभ्यास (Wet-ball practice) पर जोर दे रहा है। रांची और चेन्नई जैसे शहरों के क्रिकेट एकेडमी में युवा खिलाड़ी अब धोनी के इस इनपुट को अपनी रणनीति का हिस्सा बना रहे हैं। प्रशासन और पिच क्यूरेटर्स पर भी दबाव है कि वे ऐसी एंटी-ड्यू (Anti-dew) स्प्रे का इस्तेमाल करें जो खेल को निष्पक्ष बनाए रखे।.



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