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January 26, 2026

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महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से होते हैं अलग

पहले यह माना जाता था कि दिल का दौरा पड़ने का खतरा पुरुषों में ज्यादा होता है, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। आजकल महिलाओं में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर एक निश्चित उम्र के बाद। डॉक्टर बताते हैं कि 40-50 साल की उम्र के बाद महिलाओं को अपने दिल का खास ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि इस दौरान कई हार्मोनल बदलाव होते हैं जो हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

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क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, मेनोपॉज (Menopause) के बाद महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन (Estrogen hormone) का स्तर कम हो जाता है। यह हार्मोन पहले दिल को बीमारियों से बचाता था, क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता था और ब्लड वेसल्स को लचीला बनाए रखता था। इसके कम होने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है और ब्लड वेसल्स सख्त होने लगती हैं, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।

महिलाओं में हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण

महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने के लक्षण अक्सर पुरुषों से अलग हो सकते हैं। कई बार ये लक्षण इतने हल्के होते हैं कि महिलाएं इन्हें थकान या मामूली बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।

  • सीने में दर्द या बेचैनी: यह दर्द सीने के बीच में या बाईं तरफ हो सकता है, जो अक्सर भारीपन, दबाव या जकड़न जैसा महसूस होता है।
  • सांस फूलना: बिना किसी मेहनत के भी सांस फूलना।
  • गर्दन, जबड़े, पीठ, पेट या बांहों में दर्द: यह दर्द अचानक से कहीं भी हो सकता है और अक्सर दर्द के साथ बेचैनी भी होती है।
  • थकान और कमजोरी: अत्यधिक थकान महसूस होना, खासकर दिन में या किसी भी काम को करते समय।
  • पसीना आना: अचानक से ठंडा पसीना आना या घबराहट महसूस होना।
  • चक्कर आना या बेहोशी: अचानक चक्कर आना या बेहोश हो जाना।

कैसे करें बचाव?

डॉक्टरों का सुझाव है कि 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच करानी चाहिए। साथ ही, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बहुत जरूरी है।

  • नियमित व्यायाम: रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करें।
  • स्वस्थ आहार: फल, सब्जियां, और साबुत अनाज को अपनी डाइट में शामिल करें।
  • स्ट्रेस मैनेजमेंट: योग और मेडिटेशन से स्ट्रेस को कंट्रोल करें।
  • धूम्रपान से बचें: धूम्रपान और शराब का सेवन पूरी तरह से बंद कर दें।

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है।

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