नई दिल्ली। PM Modi Swami Chinmayananda Hologram: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने आधुनिक तकनीक के जरिए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के होलोग्राम से बातचीत की। चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, वेदांत दर्शन और भगवद्गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह कार्यक्रम 23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा।
पीएम मोदी ने होलोग्राम के जरिए स्वामी चिन्मयानंद से की बातचीत
कार्यक्रम के दौरान स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती का होलोग्राम प्रदर्शित किया गया। इसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे बातचीत की। होलोग्राम में स्वामीजी ने फरवरी 1993 में हुई मुलाकात का जिक्र किया, जब नरेंद्र मोदी उन्हें अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने पहुंचे थे।
इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह खुशनसीब हैं कि उन्हें एक बार फिर गुरुदेव के दर्शन करने का सौभाग्य मिला।
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती का निधन 3 अगस्त 1993 को अमेरिका के सैन डिएगो में हुआ था। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उस समय को याद करते हुए कहा कि गुरुदेव के जाने से सभी को उनकी कमी महसूस हुई थी।
क्या है होलोग्राम तकनीक?
होलोग्राम एक ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति या वस्तु की त्रि-आयामी (3D) छवि प्रस्तुत की जा सकती है। इससे दर्शकों को ऐसा अनुभव होता है, जैसे वह आकृति वास्तविक रूप में उनके सामने मौजूद हो। इस कार्यक्रम में इसी तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद की छवि प्रस्तुत की गई।
पीएम मोदी बोले- विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य और चिन्मय मिशन के उद्देश्यों के बीच संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब चिन्मय मिशन भी अपनी स्थापना के 100 साल पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ चुका होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने और विकसित भारत के संकल्प से लोगों को जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि चिन्मय मिशन से जुड़े लोग भी विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते समय के साथ देश के सामने नई चुनौतियां आई हैं। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा।
भारत की सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन धरोहरों का किया जिक्र
पीएम मोदी ने अपने भाषण में भारत की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण देखने को मिल रहा है। अयोध्या में राम मंदिर, उज्जैन के महाकाल धाम और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का जिक्र करते हुए उन्होंने भारतीय परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री ने विदेशों में पहुंचाई गई भारतीय मूर्तियों की वापसी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की 600 मूर्तियां वापस लाई गई हैं।
उनके मुताबिक, देश आज उस दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना भारत के ऋषियों और राष्ट्रभक्तों ने देखा था।
नई शिक्षा नीति में संस्कृति और तकनीक पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2015 में उन्हें स्वामीजी की स्मृति में एक सिक्का जारी करने का अवसर मिला था।
उन्होंने स्वामीजी के गुरु द्वारा दिए गए संदेश ‘गो, रोर लाइक अ लॉयन’ का भी उल्लेख किया। इसका अर्थ है कि आगे बढ़ो और शेर की तरह दहाड़ो।
पीएम मोदी ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने भगवद्गीता के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने के लिए अभियान शुरू किया था। आज बड़ी संख्या में युवा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं।
क्या है चिन्मय मिशन, दुनिया भर में 350 से ज्यादा केंद्र
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने वर्ष 1951 में चिन्मय मिशन की स्थापना की थी। इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य भगवद्गीता, उपनिषदों, वेदों और वेदांत दर्शन की शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है।
चिन्मय मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इसके दुनिया भर में 350 से ज्यादा केंद्र और 1,000 से अधिक आध्यात्मिक अध्ययन समूह हैं। भारत में भी मिशन की गतिविधियां कई राज्यों में संचालित होती हैं।
इसके अंतर्गत आध्यात्मिक अध्ययन, सत्संग, बच्चों और युवाओं के लिए कार्यक्रम, सामाजिक सेवा तथा शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। मिशन के शैक्षणिक नेटवर्क में भारत में 80 से ज्यादा चिन्मय विद्यालय और कई कॉलेज भी शामिल हैं।
पिछले साल शुरू हुआ था चिन्मय अमृत महोत्सव
चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव की शुरुआत पिछले साल हुई थी। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में कई धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन कार्यक्रमों में बड़े स्तर पर हवन, त्रिपुरा में मां सौंदर्या चिन्मयी मंदिर की स्थापना और ऑनलाइन भगवद्गीता पाठ जैसे आयोजन शामिल रहे। एक ऑनलाइन कार्यक्रम में दुनिया भर के एक लाख से अधिक लोगों ने एक साथ भगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ किया था।
इसके अलावा, ‘गीता पंचामृत’ कार्यक्रम के माध्यम से गीता की शिक्षाओं का प्रचार किया गया। गीता का संदेश लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से 15 युवाओं ने देश भर में 40 हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा भी की।
चिन्मय अमृत महोत्सव का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इस दौरान भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

