विवाद की वजह: पूर्व आर्मी चीफ की किताब और माइक बंद करने का आरोप
हंगामे की मुख्य जड़ पिछले हफ्ते का वह घटनाक्रम है जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के कुछ अंशों का जिक्र किया था। स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें इसे पढ़ने से रोक दिया। सोमवार को विपक्ष ने इसी मुद्दे पर नारेबाजी की। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सदन में विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं बची है और उनके नेताओं के माइक बंद कर दिए जाते हैं।
अविश्वास प्रस्ताव का गणित और प्रक्रिया
विपक्ष के इस कदम के पीछे चार प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
- नेता प्रतिपक्ष (LoP) को सदन में पर्याप्त समय न दिया जाना।
- बजट सत्र के दौरान विपक्ष के 8 सांसदों का निलंबन।
- स्पीकर द्वारा महिला सांसदों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी।
- सत्ता पक्ष के सांसदों को सदन में ‘विशेषाधिकार’ देने का आरोप।
संवैधानिक नियमों के अनुसार, स्पीकर को पद से हटाने के लिए 14 दिन का पूर्व नोटिस देना होता है। सूत्रों का कहना है कि विपक्ष इसे बजट सत्र के दूसरे चरण (9 मार्च से 2 अप्रैल) में पेश कर सकता है।
Voices from the Ground / Official Statements
“मैंने अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। हम कल इसे जमा करेंगे। हम देश को बताना चाहते हैं कि स्पीकर भेदभाव कर रहे हैं और विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।” — मल्लू रवि, कांग्रेस सांसद
“सदन चर्चा और संवाद के लिए है। मैंने कभी किसी सदस्य को बोलने से नहीं रोका, लेकिन कार्यवाही नियमों के तहत ही चलेगी। प्रश्नकाल में केवल प्रश्न पूछे जाते हैं, बजट चर्चा के दौरान सभी को बोलने का मौका मिलेगा।” — ओम बिरला, अध्यक्ष, लोकसभा
Impact on Residents / आगे क्या होगा?
संसद में जारी इस गतिरोध का सीधा असर आम नागरिक के हितों से जुड़े विधायी कार्यों पर पड़ रहा है। बजट सत्र के 9 दिनों में अब तक लगभग 20 घंटे का समय हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। इससे बजट पर होने वाली महत्वपूर्ण चर्चा टल रही है। यदि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पेश करता है, तो आने वाले दिनों में संसद में और अधिक तीखी बहस देखने को मिल सकती है। फिलहाल, विजय चौक और मकर द्वार पर निलंबित सांसद धरना दे रहे हैं, जिससे संसद परिसर में राजनीतिक सरगर्मी तेज है।



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