नई दिल्ली। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ चल रहा कार्यक्रम लगातार आर्थिक सुधारों पर केंद्रित है। हालांकि, सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में इसे “174 बदलाव” जैसी सुर्खियों के साथ पेश किया जा रहा है, लेकिन IMF के आधिकारिक दस्तावेजों में पाकिस्तान के लिए किसी एक आदेश के रूप में “174 बदलाव” की सूची नहीं दी गई है। IMF के मौजूदा कार्यक्रम में राजकोषीय सुधार, टैक्स व्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र, सरकारी कंपनियों और कारोबार से जुड़े कई सुधार शामिल हैं।
टैक्स कलेक्शन बढ़ाने पर जोर
IMF कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान को अपने टैक्स बेस को व्यापक बनाने और राजस्व प्रशासन में सुधार करने पर जोर दिया गया है। पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) को टैक्स ऑडिट मजबूत करने, डिजिटल इनवॉयसिंग और उत्पादन की निगरानी जैसे उपायों को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया है।
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IMF के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य सरकारी राजस्व को मजबूत करना और वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करना है।
ऊर्जा क्षेत्र में सुधार बड़ी शर्त
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में ऊर्जा क्षेत्र लंबे समय से महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। IMF कार्यक्रम में बिजली और गैस टैरिफ को लेकर नियमित समायोजन तथा ऊर्जा क्षेत्र की लागत कम करने वाले सुधारों पर जोर दिया गया है।
IMF के दस्तावेजों में ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय स्थिति सुधारने और सरकारी सब्सिडी को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े उपाय भी शामिल हैं।
सरकारी कंपनियों में बदलाव
IMF पाकिस्तान में सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों (SOEs) में सुधार और निजीकरण की प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण मानता है। इसका उद्देश्य सरकारी क्षेत्र का आकार कम करना, सेवाओं की दक्षता बढ़ाना और निजी निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।
मई 2026 में IMF के कार्यकारी बोर्ड ने पाकिस्तान के कार्यक्रम की तीसरी समीक्षा पूरी की थी। इसके बाद पाकिस्तान को करीब 1.1 अरब डॉलर EFF और करीब 22 करोड़ डॉलर RSF के तहत उपलब्ध कराए गए।
कारोबार और निवेश नियमों में बदलाव
IMF कार्यक्रम में कारोबार से जुड़े नियमों को सरल बनाने, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और नियामकीय पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में भी सुधार शामिल हैं। पाकिस्तान में एक राष्ट्रीय रेगुलेटरी रजिस्ट्री स्थापित करने तथा कंपनियों से जुड़े कानूनों में बदलाव की योजना भी दस्तावेजों में दर्ज है।
IMF के अनुसार पाकिस्तान के लिए मौजूदा कार्यक्रम का व्यापक लक्ष्य आर्थिक स्थिरता मजबूत करना, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना, टैक्स बेस का विस्तार करना, ऊर्जा क्षेत्र को टिकाऊ बनाना और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए संरचनात्मक सुधार करना है।

