नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिना मानकों के संचालित हो रहे निजी नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने के बड़े फर्जीवाड़े में राज्य शासन ने कड़ा एक्शन लिया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने गंभीर आरोपों के चलते छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की रजिस्ट्रार और शासकीय जी.एन.एम. कॉलेज, कांकेर की प्राचार्य श्रीमती दुर्गावती उसारे (कुंजाम) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद नर्सिंग यूनियन ने मामले में संलिप्त इंस्पेक्शन कमेटी के अधिकारियों पर भी गाज गिराने की मांग की है।
सरकारी आदेश में गंभीर आरोप
7 अप्रैल 2026 को अवर सचिव मुकेश चौहान के हस्ताक्षर से जारी निलंबन आदेश के मुताबिक, श्रीमती दुर्गावती उसारे पर नर्सिंग कॉलेजों को कूटचरचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन हेतु प्रस्तावित करने, वित्तीय अनियमितता, शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने और तथ्यों को छुपाकर गुमराह करने के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इसे सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का सीधा उल्लंघन मानते हुए उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) रायपुर निर्धारित किया गया है।
यूनियन ने खोली ‘कागज पर चल रहे’ कॉलेजों की पोल
रजिस्ट्रार के निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए यूनियन अध्यक्ष अजय त्रिपाठी ने कहा कि यह भ्रष्टाचार हिमखंड का सिर्फ एक सिरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में पिछले 25 वर्षों में नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 150 तक पहुंच गई है, जिनमें से कई बिना ‘इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC)’ की मान्यता के ही राज्य काउंसिल की मिलीभगत से धड़ल्ले से चल रहे हैं।
यूनियन ने रायपुर के बजाज कॉलोनी स्थित छत्तीसगढ़ नर्सिंग कॉलेज, लीलाज कॉलेज ऑफ नर्सिंग और रायपुर व धमतरी में संचालित महाराणा प्रताप नर्सिंग कॉलेज का उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही कैंपस में दो-दो कॉलेज चलाए जा रहे हैं या कॉलोनियों में गुमराह कर संस्थानों का संचालन हो रहा है।
फर्जी फैकल्टी और नॉन-अटेंडिंग छात्रों का खेल
प्रेस विज्ञप्ति में निरीक्षण के नाम पर हो रहे खेल का भी पर्दाफाश किया गया है। अजय त्रिपाठी ने बताया कि निजी कॉलेजों को सिर्फ दस्तावेजों के आधार पर मान्यता बांटी जा रही है। इन कॉलेजों के पास न अपना अस्पताल है और न ही कैंपस। जब औचक निरीक्षण होता है, तो कागजों में दर्ज शिक्षक मिलते ही नहीं हैं। प्रबंधन ‘स्टाफ अवकाश पर है’ का बहाना बनाकर दूसरे स्टाफ को खड़ा कर देता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बिना अस्पताल और फैकल्टी वाले इन कॉलेजों में छात्र ‘नॉन-अटेंडेंस’ (बिना क्लास गए) मोड में पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे उनके पास कोई प्रैक्टिकल ज्ञान या स्किल नहीं है। सेंट्रल इंडिया कॉलेज ऑफ नर्सिंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार कर उसे मान्यता दी गई, जिसे इस वर्ष अमान्य घोषित करना पड़ा।
यूनियन ने स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा ज्ञापन, रखीं प्रमुख मांगें:
स्वास्थ्य शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को बचाने के लिए यूनियन अध्यक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपकर स्वास्थ्य सचिव और चिकित्सा शिक्षा संचालक (DME) से निम्नलिखित मांगें की हैं:
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इंस्पेक्शन कमेटी पर कार्रवाई: भ्रष्टाचार में लिप्त निरीक्षण समिति के सदस्यों को भी तुरंत बर्खास्त किया जाए।
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बायोमेट्रिक अटेंडेंस: सभी निजी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की जाए।
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पारदर्शिता: आयुष यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर सभी कॉलेजों की मान्यता, स्टाफ और इंस्पेक्शन प्रोफार्मा सार्वजनिक किया जाए।
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शासकीय कॉलेज खुलें: शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना हो।
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छात्रों का पंजीयन 10 दिन में हो: वर्तमान में रजिस्ट्रार के भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण पास आउट नर्सिंग छात्र-छात्राओं का पंजीयन 7-8 महीने तक लटका रहता है, जिससे वे नौकरियों के फॉर्म भरने से वंचित रह जाते हैं। पंजीयन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर 10 दिन के भीतर सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था लागू हो।
रजिस्ट्रार के निलंबन के बाद अब देखना यह है कि राज्य सरकार फर्जीवाड़ा करने वाले निजी कॉलेजों और उन्हें मान्यता दिलाने वाली इंस्पेक्शन कमेटियों पर क्या कार्रवाई करती है।

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