7,721 करोड़ का पुलिस बजट: तकनीक और सुरक्षा पर जोर
गृहमंत्री ने सदन में पुलिस विभाग के लिए 7,721 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट प्रावधानों की जानकारी दी। इस बजट का मुख्य हिस्सा सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण, अंदरूनी इलाकों में नए कैंप (Forward Operating Bases) की स्थापना और जवानों की सुविधाओं पर खर्च होगा। सरकार का लक्ष्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करना है ताकि बंदूक की जगह अब सड़कों और स्कूलों की गूंज सुनाई दे।
बस्तर में बदल रही है सुरक्षा की रणनीति
विधानसभा में चर्चा के दौरान गृहमंत्री ने बताया कि सरकार अब ‘सुरक्षा के साथ विकास’ की नीति पर काम कर रही है। केंद्रीय बलों (CRPF, BSF, ITBP) की वापसी का निर्णय इस आत्मविश्वास पर आधारित है कि अगले एक साल में नक्सली नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) भविष्य में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने के लिए सक्षम होंगे।
“हम बस्तर में डर का माहौल खत्म करना चाहते हैं। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को इतिहास बनाने का हमारा संकल्प है। जब शांति स्थाई हो जाएगी, तो हमें वहां इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की आवश्यकता नहीं होगी। यह बस्तर के लिए एक नए युग की शुरुआत है।”
— विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री, छत्तीसगढ़
इस घोषणा का बस्तर के सात जिलों—दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर—के निवासियों पर व्यापक असर होगा। केंद्रीय बलों की वापसी का मतलब है कि क्षेत्र अब युद्ध क्षेत्र से सामान्य जनजीवन की ओर लौट रहा है। इससे पर्यटन, शिक्षा और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे। स्थानीय युवाओं के लिए पुलिस भर्ती में प्राथमिकता और पुनर्वास योजनाओं के लिए अतिरिक्त फंड का प्रावधान किया गया है। आने वाले महीनों में आप बस्तर के सुदूर जंगलों में नए पुलों और मोबाइल टावरों का निर्माण तेज होते देखेंगे।

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