नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तैयार की गई नई स्कूली पाठ्यपुस्तकों को लेकर एक नया विवाद और चर्चा सामने आई है। नई किताबों में लोकप्रिय गीत ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ का उल्लेख होने के बाद शिक्षा जगत, अभिभावकों और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे बच्चों को स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ने की सकारात्मक पहल बता रहे हैं, जबकि कुछ ने पाठ्य सामग्री के चयन पर सवाल उठाए हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत तैयार हुई हैं किताबें
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार नई पुस्तकों का उद्देश्य बच्चों को रटने की बजाय अनुभव आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा देना है। नई किताबों में भारतीय लोक संस्कृति, लोकगीत, कला, खेल और स्थानीय भाषाओं को भी प्रमुखता दी गई है। इसी क्रम में एक पाठ्य सामग्री में ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ का उल्लेख शामिल किए जाने के बाद यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
नई किताबों के इस अंश की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लोकगीत और सांस्कृतिक संदर्भ बच्चों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हो सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों में ऐसी सामग्री का चयन शैक्षणिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
शिक्षा विशेषज्ञों ने बताया उद्देश्य
शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा-केंद्रित शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें भारतीय संस्कृति, भाषाई विविधता और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। यदि किसी लोकगीत या सांस्कृतिक सामग्री को शैक्षणिक संदर्भ में शामिल किया गया है, तो उसका उद्देश्य भाषा, अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक समझ को विकसित करना हो सकता है।
अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भी चर्चा
नई पुस्तकों को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भी चर्चा जारी है। कुछ लोगों ने इसे बच्चों की रुचि बढ़ाने वाला कदम बताया है, जबकि कुछ ने पाठ्यक्रम में शामिल सामग्री की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। शिक्षकों का कहना है कि किसी भी सामग्री का मूल्यांकन उसके शैक्षणिक उद्देश्य और संदर्भ के आधार पर किया जाना चाहिए।
शिक्षा मंत्रालय की पहल पर बनी नजर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पाठ्यक्रम और पुस्तकों में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं ताकि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, रचनात्मक और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि नई पुस्तकों पर मिल रहे सुझाव और प्रतिक्रियाएं भविष्य में पाठ्य सामग्री को और बेहतर बनाने में सहायक हो सकती हैं।
फिलहाल, नई स्कूली किताबों में ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ के उल्लेख को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी पाठ्य सामग्री और उसके शैक्षणिक संदर्भ को समझना आवश्यक है।

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