कैसे सामने आया मामला
सूत्रों के अनुसार, कलेक्ट्रेट स्थित उपकर खाते का नियमित ऑडिट चल रहा था। इसी दौरान खाते में दर्ज शेष राशि और वास्तविक बैलेंस में अंतर पाया गया। दस्तावेजों की मिलान प्रक्रिया में लगातार कई ट्रांजैक्शन ऐसे मिले, जिनकी कोई स्पष्ट प्रशासनिक अनुमति दर्ज नहीं थी। इसके बाद बैंक से जवाब तलब किया गया।
प्राथमिक स्तर पर जांच में संकेत मिले कि संबंधित बैंक कर्मी ने आंतरिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर रकम इधर-उधर की। फिलहाल यह मामला Alleged / Developing Story की श्रेणी में है, क्योंकि जांच पूरी होना बाकी है।
प्रशासन और बैंक की प्रतिक्रिया
“खाते में अनियमितता की जानकारी मिलते ही जांच शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।”
— जिला प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी
बैंक प्रबंधन ने भी आंतरिक जांच शुरू करने की पुष्टि की है। संबंधित कर्मी को फिलहाल संवेदनशील कार्य से अलग रखा गया है।
आगे क्या कार्रवाई होगी
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, मामले में वित्तीय नियमों के उल्लंघन और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। पुलिस और ट्रेजरी विभाग की संयुक्त टीम दस्तावेज खंगाल रही है। कलेक्ट्रेट परिसर में दिनभर फाइलों की जांच चलती रही। इस घटना का सीधा असर सरकारी योजनाओं के फंड प्रबंधन पर पड़ सकता है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अन्य खातों का भी विशेष ऑडिट कराया जाएगा, ताकि किसी और गड़बड़ी को समय रहते पकड़ा जा सके।

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