Mandvi Hidma , जगदलपुर। बस्तर के कुख्यात नक्सली कमांडर मांडवी हिडमा की मौत की खबर के बाद उसके पैतृक गांव पुवर्ती में गहरा मातम छाया हुआ है। कभी नक्सल गतिविधियों का बड़ा केंद्र माने जाने वाले इस गांव में इन दिनों सन्नाटा और शोक का माहौल है। हिडमा की मौत के बाद उसके परिवार, खासकर उसकी बूढ़ी मां की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है।
गांव वालों के मुताबिक हिडमा की मां पिछले कई वर्षों से बीमार चल रही हैं और अपने बेटे से शायद ही कभी मिल पाती थीं। बेटे के मौत की खबर मिलते ही वह बेसुध होकर रो पड़ीं। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से एक मार्मिक अपील करते हुए कहा—
“मैं बूढ़ी हो चुकी हूं… बेटे का शव नहीं ला सकती। पुलिस मेरे बेटे का शव गांव ले आए, ताकि मैं उसका अंतिम संस्कार कर सकूं।”
परिवार के नजदीकी लोगों का कहना है कि मां का अपने बेटे से भावनात्मक रिश्ता हमेशा बना रहा, चाहे वह किसी भी रास्ते पर क्यों न चला हो। गांववासियों का भी कहना है कि हिडमा का हिंसक रास्ता गलत था, लेकिन मां के लिए वह हमेशा एक बेटा ही था। अब मां चाहती हैं कि परंपरा और रीति-रिवाज़ के अनुसार वह स्वयं अपने बेटे को अग्नि देकर अंतिम विदाई दें।
स्थानीय पुलिस का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी सावधानी और सुरक्षा व्यवस्था के साथ निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि हिडमा की पहचान और प्रक्रियाओं की पुष्टि के बाद ही शव को आगे के लिए भेजने पर विचार किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से कई बार नक्सली मामलों में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया जटिल हो जाती है, लेकिन प्रशासन मां की भावुक अपील का सम्मान करते हुए उचित समाधान खोजने में लगा है।
पुवर्ती गांव में इस समय गहरा सन्नाटा है। लोग घरों में दुबके हुए हैं और गांव की गलियों में सिर्फ मातम का माहौल है। कई ग्रामीणों का कहना है कि हिडमा का जीवन भटके हुए रास्ते पर चला गया, लेकिन अब उसकी मौत के बाद गांव शांति चाहता है।

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