नई दिल्ली। सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी, 2026 (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) को श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस पावन अवसर पर यदि महादेव या उनसे जुड़ी वस्तुएं सपने में दिखाई दें, तो यह जातक के जीवन में आने वाले बड़े सकारात्मक बदलावों का संकेत होता है।
शिवलिंग के दर्शन: सौभाग्य का प्रतीक
स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि महाशिवरात्रि के आसपास आपको सपने में शिवलिंग दिखाई देता है, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपकी लंबे समय से रुकी हुई मनोकामनाएं पूर्ण होने वाली हैं और आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलने वाला है। शिवलिंग का दिखना जीवन में स्थिरता और उन्नति का सूचक है।
शिव-पार्वती की संयुक्त छवि: वैवाहिक सुख
यदि किसी कुंवारे व्यक्ति को सपने में भगवान शिव और माता पार्वती एक साथ दिखाई देते हैं, तो यह शीघ्र विवाह के योग को दर्शाता है। वहीं, विवाहित जातकों के लिए यह सुखी दांपत्य जीवन और परिवार में शांति का संकेत है। इसे ‘अर्धनारीश्वर’ कृपा के रूप में देखा जाता है।
त्रिशूल और डमरू दिखने का क्या है मतलब?
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त्रिशूल: सपने में त्रिशूल का दिखना शत्रुओं पर विजय और दुखों के नाश का प्रतीक है। यह संकेत देता है कि आपके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होने वाली है।
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डमरू: डमरू की ध्वनि या दर्शन जीवन में नई लय और सकारात्मक परिवर्तन आने की सूचना देते हैं।
नंदी और गंगा की धारा
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नंदी (बैल): शिव के वाहन नंदी का सपने में आना यह बताता है कि आपको किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिलने वाली है और आपको किसी वरिष्ठ व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
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बहती गंगा: शिव की जटाओं से निकलती गंगा का सपना मन की शुद्धि और मानसिक तनाव से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
विशेष सावधानी
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि यदि ऐसे शुभ सपने महाशिवरात्रि के ब्रह्म मुहूर्त में आएं, तो जातक को उठकर महादेव का ध्यान करना चाहिए और मंदिर जाकर जलाभिषेक करना चाहिए। इससे स्वप्न का फल और अधिक प्रभावशाली हो जाता है।



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