Mahanavami 2026 : नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र में महानवमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु महानवमी पर हवन और कन्या पूजन करके अपने अनुष्ठान का समापन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं कन्या पूजन की सही विधि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े महत्वपूर्ण नियम।
महानवमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्र के अंतिम दिनों में छोटी कन्याओं का पूजन करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन को कन्या भोज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु कन्याओं को घर बुलाकर उनका सम्मान करते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं।
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आमतौर पर दो से दस वर्ष की आयु की कन्याओं को पूजन के लिए आमंत्रित किया जाता है। कई परिवारों में कन्याओं के साथ एक बालक को भी भैरव बाबा के प्रतीक के रूप में भोजन कराने की परंपरा है।
कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त कैसे जानें?
महानवमी 2026 पर कन्या पूजन का सटीक शुभ मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय पंचांग में नवमी तिथि, सूर्योदय और पूजा के समय की जानकारी देखना जरूरी है। शुभ समय शहर के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजन का समय निर्धारित करना चाहिए।
यदि अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ती हैं, तो कन्या पूजन की परंपरा परिवार की मान्यता और पंचांग में दिए गए निर्देशों के अनुसार निभाई जा सकती है।
कन्या पूजन की सही विधि
- सबसे पहले घर के पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना करें।
- इसके बाद कन्याओं को आदरपूर्वक घर आमंत्रित करें।
- कन्याओं के पैर स्वच्छ जल से धोकर उन्हें आसन पर बैठाएं।
- उनके माथे पर तिलक लगाएं और चुनरी या अन्य उपहार भेंट करें।
- श्रद्धापूर्वक हलवा, पूरी, चना जैसे पारंपरिक पकवान परोसें।
- भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा या अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें।
कन्या पूजन के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान
कन्या पूजन में स्वच्छता, श्रद्धा और सम्मान का विशेष महत्व है। कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराएं और किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें। भोजन की गुणवत्ता और बच्चों की सुविधा का ध्यान रखें। पूजा के दौरान किसी परंपरा का पालन करते समय परिवार की धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महानवमी पर सच्चे मन से मां सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन करने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

