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March 26, 2026

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रायपुर

रायपुर के लुमेश साहू ने अंतरिक्ष विज्ञान में रचा इतिहास: बने छत्तीसगढ़ के पहले ‘एनालॉग एस्ट्रोनॉट कैंडिडेट’

रायपुर: राजधानी रायपुर के समीपस्थ ग्राम बरौदा के निवासी लुमेश साहू ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। आका स्पेस स्टूडियो (AAKA Space Studio) द्वारा फरवरी 2026 में आयोजित होने वाले ‘धोलावीरा एनालॉग मिशन’ के लिए उनका चयन किया गया है इस प्रतिष्ठित स्पेस सिमुलेशन में लुमेश न केवल एक चयनित प्रतिभागी के रूप में शामिल हो रहे हैं, बल्कि वे 4 सदस्यीय टीम के ‘मिशन कमांडर’ के रूप में इस पूरे मिशन का नेतृत्व भी कर रहे हैं। इस बड़ी उपलब्धि से उनके परिवार और क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।

क्या है धोलावीरा एनालॉग मिशन? यह मिशन गुजरात के धोलावीरा में संचालित किया जा रहा है यह एक फील्ड-आधारित प्रायोगिक पहल है, जिसे अन्य ग्रहों (जैसे मंगल या चंद्रमा) जैसी स्थितियों से प्रेरित एक नियंत्रित और अनुसंधान-संचालित वातावरण में डिज़ाइन किया गया है

  • पूर्ण आइसोलेशन (Isolation): इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह पूरे एक सप्ताह तक चलेगा। इस दौरान लुमेश और उनकी टीम का बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं रहेगा।

  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी के बाहर जीवन जीने के वास्तविक सूक्ष्म जगत (माइक्रोकॉस्म) का अनुभव कराना है इससे चंद्रमा या मंगल ग्रह पर संचार में होने वाली देरी (Communication Delay) और अकेलेपन का अध्ययन किया जा सकेगा, जो क्रू के व्यवहार और चरम पर्यावरण सिमुलेशन के अध्ययन को मजबूत करता है

रायपुर

लुमेश की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता

लुमेश साहू (पिता: कोमेन्द्र कुमार साहू, माता: खुशबू साहू) की प्रारंभिक शिक्षा ज्ञानदीप विद्या मंदिर, मांढर से पूरी हुई है।

  • वर्तमान में वे रायपुर की ITM यूनिवर्सिटी में बायोटेक्नोलॉजी के होनहार छात्र हैं।

  • अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वे वर्तमान में ‘अरकासा स्पेस आर्किटेक्चर’ (ARKASA Space Architecture) संगठन में एक ‘स्पेस बायोटेक्नोलॉजी रिसर्चर’ (Space Biotechnology Researcher) के पद पर कार्यरत हैं।

युवाओं के लिए बनी बड़ी प्रेरणा

रायपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर स्पेस एनालॉग मिशन को कमांड करने तक का लुमेश साहू का यह सफर छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सही दिशा और लगन हो, तो राज्य के युवा विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के वैश्विक पटल पर भी नेतृत्व कर सकते हैं।

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