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March 31, 2026

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Jaggi Murder Case : अमित जोगी को मिली जमानत, 23 साल पुराने ‘कत्ल के राज’ पर अप्रैल में होगी अंतिम सुनवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत अमित जोगी को निचली अदालत से राहत मिल गई है। न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा की अदालत में अमित जोगी ने 50-50 हजार रुपये के दो बॉन्ड और जमानत के पट्टे पेश किए, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने उन्हें जमानत दे दी है।

क्या है पूरा मामला? राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन कद्दावर नेता रामअवतार जग्गी की 4 जून 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 28 को सजा सुनाई गई थी। अमित जोगी को साल 2007 में निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। लेकिन, जग्गी परिवार ने इस फैसले को चुनौती दी और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब यह मामला दोबारा खुला है।

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सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से बदला समीकरण हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई (CBI) की अपील में हुई देरी को माफ करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई का रास्ता साफ किया है। शीर्ष अदालत के कड़े रुख के बाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट इस मामले में अप्रैल महीने में अंतिम सुनवाई करने जा रहा है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह सुनवाई अमित जोगी के राजनीतिक और व्यक्तिगत भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होगी।

अमित जोगी का पक्ष: “सत्य की जीत होगी” जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अमित जोगी ने न्यायपालिका पर भरोसा जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए कहा है कि उन्हें दो दशक पहले ही इस मामले में बरी किया जा चुका है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि अंततः जीत सत्य की ही होगी।

सियासी गलियारों में सुगबुगाहट जग्गी हत्याकांड का जिन्न एक बार फिर बाहर निकलने से प्रदेश की सियासत गरमा गई है। चूंकि अमित जोगी एक प्रमुख क्षेत्रीय दल के मुखिया हैं, ऐसे में अप्रैल में होने वाली अंतिम सुनवाई पर न केवल कानूनी जानकारों की, बल्कि सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।

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