Head Constable Demotion : बिलासपुर| छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में अदालत में चालान पेश करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में फंसे प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) अनिल साहू के खिलाफ कड़ा विभागीय कदम उठाया गया है। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने उन्हें उनके मौजूदा पद से डिमोट कर आरक्षक (Constable) पद पर भेज दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
नवंबर 2024 में एक पीड़ित ने पुलिस विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप था कि प्रधान आरक्षक अनिल साहू ने कोर्ट में चालान पेश करने और जमानत आवेदन पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की। पीड़ित ने इस संपूर्ण घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो में:
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अनिल साहू जमानत आवेदन पर कार्रवाई के लिए रुपए मांगते दिख रहे थे।
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वाहन को राजसात (सीज) न करने के लिए 50,000 रुपए की डिमांड की जा रही थी।
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वीडियो बनाने वाला व्यक्ति उनसे मोलभाव करते हुए सुनाई देता है।
वायरल वीडियो के आधार पर विभाग ने तत्काल जांच शुरू की।
जांच में दोषी पाए गए अनिल साहू
जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए, जिसके बाद एसएसपी बिलासपुर ने कठोर कार्रवाई करते हुए:
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प्रधान आरक्षक से पद घटाकर आरक्षक (कांस्टेबल) बनाया
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उन्हें 2 साल तक यहीं पद पर काम करने का निर्देश दिया
यह कार्रवाई विभाग की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को दर्शाती है, जो रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार पर त्वरित और सख्त निर्णय के पक्ष में है।
विभाग की सख्ती: भ्रष्टाचार पर लगाम की कोशिश
पुलिस विभाग पिछले कुछ महीनों से रिश्वतखोरी, अनैतिक मांग और कदाचार में लिप्त कर्मचारियों के खिलाफ लगातार एक्शन ले रहा है। इस मामले को भी सख्त उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है ताकि भविष्य में किसी कर्मचारी को इस तरह के कृत्य के लिए प्रोत्साहन न मिले।

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