विवाद की जड़: बहाली और अनुशासनहीनता के आरोप
मामला तब गरमाया जब 17 अक्टूबर 2025 को निलंबित की गईं वंदना पांडे को दोबारा उसी स्कूल में बहाल कर दिया गया। उन पर पहले भी शैक्षणिक गुणवत्ता में लापरवाही और स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगे थे। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के बहाली आदेश के बाद सोमवार सुबह छात्र क्लास छोड़कर सड़क पर उतर आए। छात्रों का साफ कहना था कि उन्हें स्कूल में पुरानी व्यवस्था ही चाहिए और वे वंदना पांडे के नेतृत्व में पढ़ाई नहीं करेंगे।
रील बनाने वाली शिक्षिकाओं को भी नोटिस
प्रशासन ने केवल प्राचार्य पर ही नहीं, बल्कि स्कूल की अनुशासनहीनता में शामिल अन्य स्टाफ पर भी कड़ा रुख अपनाया है।
- प्राचार्य के खिलाफ बगावत करने वाली और स्कूल परिसर में डांस रील बनाने वाली शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
- जांच में पाया गया कि प्राचार्य और स्टाफ के बीच आपसी खींचतान के चलते स्कूल का माहौल खराब हो रहा था।
- कलेक्टर भगवान सिंह उईके ने शिक्षा विभाग को स्कूल की व्यवस्थाओं को तुरंत पटरी पर लाने के निर्देश दिए हैं।
Voices from the Ground / Official Statements
“हमें वो प्राचार्य नहीं चाहिए। पहले भी उनके रहने से स्कूल की पढ़ाई का नुकसान हुआ था। जब तक उन्हें हटाया नहीं गया, हम स्कूल के अंदर कदम नहीं रखने वाले थे।” — कक्षा 10वीं का एक छात्र, स्वामी आत्मानंद स्कूल, गरियाबंद
“छात्रों और शिक्षकों की मांग पर प्राचार्य वंदना पांडे को मूल विभाग वापस भेज दिया गया है। अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी, चाहे वो प्राचार्य हों या रील बनाने वाले शिक्षक।” — जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), गरियाबंद



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