रायपुर: छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के मामलों पर नकेल कसते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ED ने प्रदेश के दो बहुचर्चित मामलों— री-एजेंट (चिकित्सा उपकरण) खरीदी घोटाला और भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला — में कार्रवाई करते हुए 103 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है।
प्रमुख कार्रवाई: कहां और क्या हुआ जब्त?
ED द्वारा जब्त की गई संपत्तियों का जाल छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक फैला हुआ है। कुर्क की गई संपत्तियों में शामिल हैं:
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रायपुर, दुर्ग और महाराष्ट्र स्थित आलीशान मकान।
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विभिन्न शहरों में स्थित व्यावसायिक भूखंड (Plots)।
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औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित फैक्ट्रियां।
1. चिकित्सा उपकरण घोटाला: 80.36 करोड़ की संपत्ति अटैच
इस मामले में दुर्ग की मोक्षित कॉरपोरेशन मुख्य जांच के घेरे में है। ED की जांच में सामने आया है कि:
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संचालक की मिलीभगत: कंपनी के संचालक शशांक चोपड़ा ने स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) के अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में भारी हेरफेर की।
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नियमों की अनदेखी: टेंडर की शर्तों को इस तरह बदला गया जिससे मोक्षित कॉरपोरेशन को अनुचित लाभ मिले।
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भ्रष्टाचार का जाल: इस घोटाले में अब तक 80.36 करोड़ रुपये की संपत्ति को चिन्हित कर कुर्क किया गया है।
2. भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण के बदले दिए जाने वाले मुआवजे में भी भारी फर्जीवाड़ा पाया गया है।
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फर्जीवाड़ा: आरोप है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर मुआवजे की राशि को हड़पने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर की और अपात्र लोगों को लाभ पहुँचाया।
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इस मामले में भी करोड़ों की संपत्ति अटैच की गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

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