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Dharmendra Pradhan ने इस्तीफे के बाद पहली बार तोड़ी चुप्पी: ‘मैं किसान का बेटा हूं’, विरोध और ‘वापस जाओ’ के नारों पर धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार

भुवनेश्वर: Dharmendra Pradhan Resignation धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के बाद पहली बार तोड़ी चुप्पी: Dharmendra Pradhan Resignation के बाद पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि Gen Z हमारे बच्चे हैं और उन्हें गुमराह करने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए मंत्री पद कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा और उन्होंने खुद प्रधानमंत्री के सामने इस्तीफे की पेशकश की थी।

‘हमारे बच्चे हैं Gen Z’

भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद और उसके बाद हुए विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा उनके अपने बच्चे हैं और उन्हें लेकर उन्हें चिंता है।

प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे इस आयु वर्ग में आए हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की अपनी उम्मीदें और आकांक्षाएं हैं और यही युवा भारत को विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

‘पद मेरे लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा’

अपने इस्तीफे को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पद उनके लिए कभी प्राथमिकता नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश की थी।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि देश के युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, युवाओं के मुद्दों को समझने और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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विरोध और ‘वापस जाओ’ के नारों पर भी बोले

कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजद कार्यकर्ताओं के विरोध और ‘वापस जाओ’ के नारों से वह परेशान नहीं हैं।

प्रधान ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और यदि ओडिशा के लोग उन्हें वापस जाने के लिए कहेंगे, तब भी वह वापस आएंगे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा करने वाला कोई काम नहीं किया है।

NEET विवाद के बीच दिया था इस्तीफा

NEET पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद यह पहली बार है जब उन्होंने सार्वजनिक मंच से अपने इस्तीफे और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात की है।

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