बालोद। जिले में महिला आरक्षक द्वारा डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके पर लगाए गए दुष्कर्म, गर्भपात और आर्थिक शोषण के गंभीर आरोपों के मामले में कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अब आरोपी डिप्टी कलेक्टर की गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है।
मामले में जिला न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने दलील दी कि महिला आरक्षक ने ब्लैकमेलिंग कर झूठा केस दर्ज कराया है। वहीं पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराते हुए बैंक स्टेटमेंट सहित कई सबूत भी पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया।
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पीड़िता की शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2017 में आईटीआई की पढ़ाई के दौरान दिलीप उइके से उसकी मुलाकात हुई और दोनों के बीच संबंध बने। शादी का झांसा देकर आरोपी ने कई बार शारीरिक संबंध बनाए और गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात कराया। आरोप है कि आरोपी ने पढ़ाई के नाम पर महिला से पैसे भी लिए और फिर से संबंध बनाए।
वर्ष 2024 में आरोपी ने पीड़िता को अंडमान घुमाने ले जाकर शारीरिक संबंध बनाया। इसके बाद महिला दोबारा गर्भवती हुई तो आरोपी ने फिर से गर्भपात करा दिया। पीड़िता का आरोप है कि 2025 में भी शादी का वादा कर आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाए और उससे करीब 3.30 लाख रुपये लिए। तीसरी बार गर्भवती होने पर भी दवा देकर गर्भपात कराया गया।
शादी से इनकार और दूरी बनाने पर पीड़िता ने आखिरकार डौंडी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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