Delimitation 2026 : रायपुर | 4 अप्रैल, 2026 भारत में वर्ष 2026 के बाद प्रस्तावित देशव्यापी परिसीमन (Delimitation) को लेकर छत्तीसगढ़ के गलियारों में अभी से सियासी हलचल तेज हो गई है। जनसंख्या के नए आंकड़ों और भौगोलिक विस्तार के आधार पर होने वाले इस बदलाव से राज्य का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह बदल सकता है। विशेषज्ञों और रणनीतिकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया के बाद न केवल विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि कई मौजूदा आरक्षित और सामान्य सीटों का स्वरूप भी बदल जाएगा।
सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी के आसार
वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं। सूत्रों और प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 110 से 120 के बीच पहुंच सकती है। इसी तरह लोकसभा की 11 सीटों में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। सीटों के इस विस्तार का मुख्य आधार बढ़ती जनसंख्या और प्रशासनिक सुगमता होगा।
आरक्षित सीटों का समीकरण: क्या बदलेगा?
छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बहुल राज्य है, जहाँ वर्तमान में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 29 और अनुसूचित जाति (SC) के लिए 10 सीटें आरक्षित हैं।
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बढ़ सकती हैं आरक्षित सीटें: जनसंख्या के नए अनुपातों के आधार पर बस्तर और सरगुजा संभाग में ST आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ सकती है।
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सामान्य सीटों पर प्रभाव: मैदानी इलाकों (जैसे रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर) में तेजी से बढ़े शहरीकरण के कारण सामान्य सीटों की संख्या में भी इजाफा होगा।
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सीटों का रोटेशन: परिसीमन के दौरान कई ऐसी सीटें जो लंबे समय से आरक्षित हैं, वे सामान्य हो सकती हैं, और कुछ सामान्य सीटें आरक्षित श्रेणी में जा सकती हैं। इससे कई दिग्गज नेताओं के निर्वाचन क्षेत्र बदल सकते हैं।
इन क्षेत्रों में दिखेगा सबसे ज्यादा असर
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रायपुर और दुर्ग संभाग: शहरी आबादी में भारी वृद्धि के कारण इन जिलों में नई विधानसभा सीटें सृजित होने की प्रबल संभावना है।
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बस्तर और सरगुजा: दुर्गम क्षेत्रों में जनसंख्या के फैलाव को देखते हुए नए निर्वाचन क्षेत्रों का गठन किया जा सकता है, जिससे मतदाताओं को अपने प्रतिनिधि तक पहुंचने में आसानी होगी।
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महिला आरक्षण का तड़का: हालिया ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बाद, परिसीमन के साथ ही 33% महिला आरक्षण लागू होने की संभावना है, जिससे छत्तीसगढ़ की 120 संभावित सीटों में से लगभग 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
नेताओं में बेचैनी, बिछने लगी रणनीतिक बिसात
परिसीमन की आहट ने प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों (भाजपा और कांग्रेस) के नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कई विधायक इस डर में हैं कि उनका मौजूदा क्षेत्र कटकर छोटा हो सकता है या आरक्षित घोषित हो सकता है। यही कारण है कि नेता अब अपने मूल क्षेत्र के साथ-साथ पड़ोसी क्षेत्रों में भी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

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