रिकॉर्ड भागीदारी: उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 25,000 से अधिक परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया।
विविधता: परीक्षा केंद्रों पर बुजुर्गों के साथ-साथ जेल के कैदी और मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादी भी शामिल हुए।
ऐतिहासिक बदलाव: दशकों बाद पढ़ाई छोड़ने वाले ग्रामीणों ने फिर से साक्षर होने का संकल्प लिया।
Chhattisgarh Literacy Rate Update , बस्तर — बस्तर ने अशिक्षा के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी पारी खेल दी है। रविवार को आयोजित ‘उल्लास महापरीक्षा’ में जिले के 25 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लेकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह केवल एक परीक्षा नहीं थी, बल्कि उन हजारों अधूरे सपनों की वापसी थी जो गरीबी या संघर्ष के कारण पीछे छूट गए थे। केंद्रों पर उत्साह ऐसा था मानो कोई बड़ा फाइनल मैच चल रहा हो, जहां हर खिलाड़ी अपनी जीत के लिए कलम चला रहा था।
बस्तर के सुदूर वनांचलों में बने परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं। जिला प्रशासन ने इस अभियान को युद्ध स्तर पर चलाया, जिसका नतीजा आंकड़ों में साफ नजर आया। सबसे चौंकाने वाली और सकारात्मक तस्वीर जेलों और पुनर्वास केंद्रों से आई, जहां समाज की मुख्यधारा से कटे लोगों ने भी साक्षर होने की इच्छा जताई।
कुल परीक्षार्थी: 25,000+ (बुजुर्ग, युवा और विशेष वर्ग)
विशेष भागीदारी: स्थानीय जेल के कैदी और आत्मसमर्पित पूर्व माओवादी।
उद्देश्य: बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy).
बुजुर्गों ने चश्मा लगाकर वर्णमाला के अक्षर उकेरे, तो वहीं युवाओं ने डिजिटल युग में खुद को अपडेट करने के लिए इस परीक्षा को एक मौके की तरह इस्तेमाल किया। प्रशासन ने सुदूर इलाकों के लिए मोबाइल परीक्षा वैन और विशेष वॉलंटियर्स की तैनाती की थी।
“मैंने कभी नहीं सोचा था कि 60 साल की उम्र में फिर से स्कूल जाऊंगा। आज जब मैंने अपना नाम लिखना सीखा, तो लगा जैसे मैंने कोई बड़ी जंग जीत ली है। अब मैं बैंक में अंगूठा नहीं, दस्तखत करूंगा।”
— एक बुजुर्ग परीक्षार्थी, बस्तर
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