सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद हुई गिरफ्तारी
बता दें कि ये दोनों अधिकारी लंबे समय से फरार चल रहे थे। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद रायपुर की विशेष अदालत ने उनके खिलाफ स्थायी वारंट और उद्घोषणा जारी की थी। ACB-EOW की टीम ने जाल बिछाकर दोनों को हिरासत में लिया। अब पूछताछ के दौरान इस बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट के अन्य चेहरों और ‘मनी ट्रेल’ का खुलासा होने की उम्मीद है।
32 करोड़ से अधिक की लूट का आरोप
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि राजस्व अधिकारियों ने जमीन दलालों के साथ मिलकर नायकबांधा, टोकरो और उरला जैसे गांवों में जमीन के फर्जी बंटवारे किए। अधिकारियों ने पिछली तारीखों (Backdated) में नामांतरण और सीमांकन के दस्तावेज तैयार किए ताकि कुछ खास लोगों को उनकी पात्रता से कई गुना अधिक मुआवजा दिलाया जा सके। इस पूरी साजिश में शासन को सीधे तौर पर करीब 32 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ है।
“राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर शासन के खजाने को करोड़ों का चूना लगाया गया है। रिमांड के दौरान आरोपियों से फर्जी दस्तावेजों की बरामदगी और इस घोटाले में शामिल अन्य बड़े नामों के बारे में पूछताछ की जाएगी।” — जांच अधिकारी, ACB-EOW छत्तीसगढ़



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