CG News : रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की मौत के आंकड़ों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पिछले पांच वर्षों में राज्य की विभिन्न जेलों में अभिरक्षा (कस्टडी) के दौरान 375 कैदियों की मौत दर्ज की गई है। इनमें से 311 मामलों की जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को प्राप्त हो चुकी है, जबकि 62 मामलों में अब तक जांच रिपोर्ट लंबित है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली, स्वास्थ्य सुविधाओं और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
2022 में सबसे अधिक हुईं मौतें
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 जेल अभिरक्षा में मौतों के लिहाज से सबसे चिंताजनक रहा। इस वर्ष 90 कैदियों की मौत दर्ज की गई, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। इसके अलावा अन्य वर्षों में भी लगातार मौतों के मामले सामने आए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जेलों में स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
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हालांकि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग-अलग रही हैं, लेकिन लगातार सामने आ रहे ऐसे आंकड़े जेल प्रबंधन के लिए गंभीर चुनौती माने जा रहे हैं।
62 मामलों की जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 375 मौतों में से 311 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 62 मामलों में अब तक जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इन लंबित मामलों को लेकर संबंधित विभागों से रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
जांच रिपोर्ट लंबित होने के कारण इन मामलों में मौत के कारणों और परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आ पाया है। ऐसे में समय पर जांच पूरी करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
स्वास्थ्य सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था पर सवाल
जेलों में लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य सेवाओं, नियमित मेडिकल जांच, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कैदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर उपचार और बेहतर निगरानी व्यवस्था से कई मामलों में जान बचाई जा सकती है।
साथ ही जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की संख्या और संसाधनों की कमी भी कई बार व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में होने वाली प्रत्येक मौत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होना बेहद जरूरी है। इससे न केवल मौत के वास्तविक कारणों का पता चलता है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।

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