High Court’ रायपुर।’ मवेशियों की तस्करी और अवैध परिवहन से जुड़े मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस द्वारा जब्त किए गए कृषि उपयोगी पशुओं को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक आरोपी, वाहन चालक या कथित मालिक को सुपुर्दनामे पर नहीं सौंपा जा सकता। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि ऐसे सभी मवेशियों को केवल पंजीकृत गौशाला, गोसदन या मान्यता प्राप्त गोरक्षण संस्थान की अभिरक्षा में रखा जाएगा। इस फैसले को पशु संरक्षण और पशु तस्करी पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
डिवीजन बेंच ने सुनाया अहम निर्णय
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पशु तस्करी के मामलों में जब्त किए गए मवेशियों को आरोपी या कथित मालिक को वापस सौंपना कानून की मूल भावना और उद्देश्य के विपरीत होगा।
अदालत ने कहा कि जब किसी मामले की जांच और सुनवाई लंबित हो, तब तक जब्त पशुओं की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है। इसलिए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जाना आवश्यक है।
गौशाला और गोरक्षण संस्थानों में होगी देखभाल
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब्त किए गए पशुओं को केवल पंजीकृत गौशालाओं, गोसदनों या अधिकृत गोरक्षण संस्थानों की अभिरक्षा में रखा जाएगा। इन संस्थानों की जिम्मेदारी होगी कि पशुओं के भोजन, उपचार और देखभाल की समुचित व्यवस्था की जाए।
अदालत का मानना है कि इससे पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और उनके दोबारा अवैध परिवहन या तस्करी की आशंका भी कम होगी।
आरोपियों को सुपुर्दगी देने पर जताई चिंता
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि यदि जब्त मवेशियों को आरोपी या कथित मालिकों के सुपुर्द कर दिया जाता है, तो उनके दोबारा अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल होने की संभावना बनी रहती है। ऐसी स्थिति कानून के उद्देश्य को विफल कर सकती है और पशु संरक्षण से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा कि पशु तस्करी जैसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है।
पुलिस और निचली अदालतों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य की पुलिस और अधीनस्थ अदालतों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हो गए हैं। अब मवेशी तस्करी से जुड़े मामलों में जब्त पशुओं की सुपुर्दगी पर निर्णय लेते समय अदालतों को इस आदेश का पालन करना होगा।
कानूनी जानकारों का मानना है कि इससे भविष्य में ऐसे मामलों में एकरूपता आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
पशु तस्करी पर अंकुश लगाने की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला पशु तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई को और मजबूत करेगा। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि जब्त पशुओं को आरोपियों के हवाले करने से तस्करी की घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पाती।
हाईकोर्ट के इस आदेश से अब जांच एजेंसियों को भी स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा और जब्त पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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