Big Decision of CG High Court : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवा से बर्खास्त कर्मचारियों के वेतन को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के आधार पर नौकरी से हटाया गया हो और बाद में वह अपील में बरी हो जाए, तो केवल बरी होने के आधार पर उसे बर्खास्तगी अवधि का पूरा बकाया वेतन नहीं दिया जा सकता।
‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का सिद्धांत लागू
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे मामलों में “काम नहीं तो वेतन नहीं” का सिद्धांत लागू होगा।
अपील खारिज, नहीं मिला वेतन लाभ
कोर्ट ने यह फैसला विद्युत मंडल के एक पूर्व कर्मचारी की अपील खारिज करते हुए दिया। कर्मचारी ने बर्खास्तगी अवधि के दौरान का पूरा वेतन देने की मांग की थी, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।
सेवा नियमों के अनुसार होगा निर्णय
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में कर्मचारी को वेतन देने या न देने का निर्णय सेवा नियमों और परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाएगा, न कि केवल बरी होने के आधार पर।
महत्वपूर्ण नजीर बना फैसला
यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, जहां कर्मचारी बरी होने के बाद बकाया वेतन की मांग करते हैं।

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