Bengal SIR : कोलकाता/नई दिल्ली | चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बंगाल समेत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे मतदाता पहचान प्रणाली (SIR – Special Identification Report) के तहत ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाले मतदाताओं की सूची शनिवार को सार्वजनिक कर दी है। इस सूची में लगभग 1.25 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जिनके नाम और विवरण में विसंगति पाई गई है। अब यह लिस्ट ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और नगर वार्ड दफ्तरों में भी चिपकाई जाएगी, ताकि आम जनता और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी हो।
Bengal SIR : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने SIR प्रक्रिया पर दी जानकारी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों और विसंगतियों को पहचानना और उन्हें समय पर सुधारना है। उन्होंने कहा, “SIR 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू हो चुका है और बाकी राज्यों में इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा। यह एक पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें हर नागरिक को अपने मतदाता विवरण की जांच करने और आवश्यक सुधार कराने का अवसर मिलेगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को आदेश देते हुए कहा था कि लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस वाले 1.25 करोड़ वोटर्स की सूची ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे मतदाता सूची की पारदर्शिता बढ़ेगी और कोई भी नागरिक अपने नाम में त्रुटि होने पर समय रहते उसका सुधार कर सकेगा।

हालांकि, इस कदम पर आलोचना भी हुई है। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने इसे लेकर चिंता व्यक्त की और कहा, “SIR प्रक्रिया में जल्दबाजी दिखाई दे रही है। इससे कुछ निर्दोष मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग को सभी विवरणों की बारिकी से जांच करनी चाहिए और किसी भी गलती की संभावना को न्यूनतम करना चाहिए।” विशेषज्ञों का कहना है कि लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का अर्थ है कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति की जन्म तिथि, पता, नाम या अन्य विवरण में असंगति पाई गई है।


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